राजस्थान हाईकोर्ट ने सब-इंस्पेक्टर/प्लाटू न कमांडर भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) में लंबी कूद का दोबारा मौका मांगने वाली चार याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने मंगलवार को कहा कि वर्ष 1989 का सर्कुलर तीन मौकों का स्थायी अधिकार नहीं देता। पाली के पाली जिले की रानी तहसील के गफ्फार खान सहित अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने बारिश, फाउल और माप के विवाद को भी पीईटी दोबारा कराने का आधार नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि स्पष्ट अनियमितता या दुर्भावना साबित हुए बिना वह शारीरिक दक्षता बोर्ड की जगह अपना आकलन नहीं कर सकता। बारिश और ट्रैक की हालत सिर्फ विनोद कुमार ने नहीं झेली, उसी जगह पर पीईटी देने वाले सभी उम्मीदवारों ने झेली। माप के विवाद पर कोर्ट ने 23 सितंबर को अतिरिक्त महाधिवक्ता से पीईटी की वीडियोग्राफी पेश करने को कहा। इसे देखने पर कोर्ट को अंक दर्ज करने में कोई गलती या तय प्रक्रिया से हटना नहीं दिखा। बता दें कि आरपीएससी ने 17 जुलाई 2025 को 1015 पदों पर भर्ती निकाली थी। लिखित परीक्षा 6 अप्रैल को हुई और सफल अभ्यर्थियों की पीईटी अगस्त में हुई थी। पीईटी के 100 अंकों में लंबी कूद के 30 अंक थे। ये आपत्तियां थीं याचिकाओं में : पाली के सिवास (रानी) निवासी गफ्फार खान (26) का आरोप था कि मूल्यांकन अधिकारी ने जानबूझकर कम अंक देकर उन्हें अयोग्य कर दिया। नागौर के अलाय निवासी विनोद कुमार (32) सीआरपीएफ अजमेर केंद्र पर 3 अगस्त को पहुंचे। उनका कहना था कि भारी बारिश से ट्रैक गीला रहा और इससे दौड़ व लंबी कूद का प्रदर्शन बिगड़ गया। बालोतरा के कोलू (बाइतू) के जसवंत सिंह (25) को फाउल लाइन छूने पर लंबी कूद में शून्य अंक मिले। जैसलमेर के फूलासर के गिरधारी सिंह (24) का दावा था कि उन्होंने 13 फीट कूदा, लेकिन पर्यवेक्षक ने कम दूरी दर्ज की। मौके पर आपत्ति के बावजूद दोबारा माप नहीं हुआ। आयोग ने उन्हें संबंधित विभाग के पास जाने की सलाह दी। याचिकाकर्ताओं ने 1989 के नारायण लाल बनाम राजस्थान राज्य फैसले का हवाला दिया, जिसमें दो और मौके मिले थे। कोर्ट ने कहा कि वह भर्ती फैसला है। सीआईएसएफ और सीएपीएफ भर्ती में तीन मौकों की दलील पर कोर्ट ने कहा कि वहां यह उनके अपने विज्ञापन-नियमों में लिखा है। बारिश के मामले में कोर्ट ने 2019 के खंडपीठ फैसले का हवाला दिया, जिसमें कुछ को दोबारा मौका देना "दूसरी पारी" जैसा और "दो पैमाने" बनाने वाला बताया था। कार्यकारी निर्देश अधिकारी या सरकार के आदेश होते हैं, जो नियमों की कमी भर सकते हैं, पर उन्हें बदल नहीं सकते।