भास्कर न्यूज | सवाई माधोपुर जीवन को उन्नत बनाने के लिए, स्वयं को जानने के लिए किया गया अध्ययन स्वाध्याय कहलाता है। सबसे बड़ा तप, यदि कोई है, तो वह स्वाध्याय है। उपवास शरीर को शुद्ध करता है। स्वाध्याय आत्मा को शुद्ध करता है। आज हमारे पास मोबाइल देखने के लिए 4 घंटे हैं, पर शास्त्र पढ़ने के लिए 10 मिनट नहीं हैं। बिना ज्ञान के क्रिया अधूरी है। हम साधना तो करते हैं, पर क्यों करते हैं, यह पता नहीं। स्वाध्याय हमें बताता है कि हम क्या कर रहे हैं। यह भी बताता है कि क्यों कर रहे हैं। ज्ञान के बिना चारित्र नहीं है। चारित्र के बिना मुक्ति संभव नहीं है। उक्त विचार तेरापंथ भवन, आदर्श नगर में वरिष्ठ प्रेक्षा प्रशिक्षक, प्रवक्ता उपासक पारसमल दुगड़ एवं सहयोगी उपासक रमेश कुमार सिंघवी, मुंबई ने श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, आदर्श नगर के तत्वावधान में आयोजित पर्युषण महापर्व की आराधना के दूसरे दिन, स्वाध्याय दिवस पर व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि जैन धर्म में स्वाध्याय के 5 प्रकार बताए गए हैं। वाचना—पढ़ना। पृच्छना—पूछना/शंका-स माधान। अनुप्रेक्षा—चिंतन-मन न करना। आम्नाय—बार-बार याद करना। धर्मकथा—दूसरों को सुनाना। पुस्तकालय में रखी पुस्तक किसी को ज्ञानी नहीं बनाती। पढ़ी हुई पुस्तक ही ज्ञानी बनाती है। जो प्रतिदिन स्वाध्याय करता है, उसके जीवन में कभी अंधकार नहीं आता। इससे पूर्व, स्वाध्याय दिवस पर कार्यक्रम की शुरुआत उपासक-द्वय द्वारा प्रस्तुत नमस्कार महामंत्र से हुई। महिला मण्डल की बहनों ने मंगलाचरण की स्तुति दी। पूरे दिन चलने वाले आध्यात्मिक कार्यक्रमों के अतिरिक्त, प्रातः 6 से 7 बजे तक चलने वाले सत्र में वरिष्ठ उपासक पारसमल दुगड़ ने सायटिका बीमारी के उपचार के लिए प्रायोगिक प्रयोगों की अनुभूतिपरक प्रस्तुति दी। रात्रिकालीन सत्र में भगवान महावीर एवं गौतम संवाद के माध्यम से आगमिक ज्ञान की तात्विक प्रस्तुति दी गई। सवाई माधोपुर| नगर परिषद क्षेत्र के शहर स्थित महावीर भवन में व्याख्यानी यशवन्त मुनि, सुभाष मुनि, अशोक मुनि आदि ठाणा 3 के सानिध्य में पर्युषण पर्व साधना कार्यक्रम जारी है। धर्मसभा में यशवन्त मुनि ने कहा कि संयम का साधन ज्ञान-पूर्वक ही होता है। इसके लिए जीव-अजीव आदि तत्वों का ज्ञान आवश्यक है। ज्ञानी सभी जगह अपनी सुगन्ध फैलाता है। पाप का त्याग करने से धर्म होता है। सेवाभावी अशोक मुनि ने अन्तगड़दशा सूत्र आगम का वाचन किया। शाखा अध्यक्ष हेमेन्द्र जैन व शाखा मन्त्री मुकेश जैन के उपवास, बेला, तेला, आयम्बिल, निवि, एकासन, एकलठाणा तपस्या के प्रत्याख्यान हुए। शाखा प्रमुख मनीष जैन, सचिव धर्मेन्द्र जैन ने सामूहिक तपस्या की अनुमोदना करवाई। युवती मण्डल शाखा संयोजक श्वेता जैन ने पर्युषण अभिनन्दन गीत प्रस्तुत किया।