चिप्स-बिस्किट के रैपर सहित सामान्य तरीके से रिसाइकिल नहीं होने वाले प्लास्टिक का अब सड़क निर्माण में उपयोग हो सकेगा। गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के अभियान्त्रिकी महाविद्यालय के दो विद्या संबल संकाय सदस्यों सागर गुप्ता और रोहन गुप्ता ने मल्टीलेयर प्लास्टिक कचरे से बिटुमेन मिश्रण विकसित किया है। इस तकनीक पर पेटेंट प्रकाशित हुआ है। प्राचार्य डॉ. भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि ट्रांसपोर्टेशन एवं सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विकसित इस तकनीक में मल्टीलेयर प्लास्टिक कचरे का उपयोग बिटुमेन को संशोधित करने के लिए किया गया है। यानी जिस प्लास्टिक कचरे का पारंपरिक तरीके से पुनर्चक्रण चुनौतीपूर्ण होता है, उसे सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के साथ उपयोग करने की तकनीक विकसित की गई है। संकाय सदस्यों ने बताया कि इस तकनीक में मल्टीलेयर प्लास्टिक कचरे को बिटुमेन में मिलाकर उसका संशोधित मिश्रण तैयार किया जाता है। यानी कचरे को सीधे फेंकने के बजाय सड़क निर्माण की सामग्री में उपयोग किया जा सकता है।