शहर के राजनगर स्थित अरविंद स्टेडियम में नगर परिषद की ओर से आयोजित पांच दिवसीय गणेश महोत्सव के दौरान बुधवार रात को एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। आयोजन में देशभक्ति, राजस्थानी लोक संगीत और भक्ति भजनों की कई रंगारंग प्रस्तुतियां दी गईं। गजानन महाराज की वंदना से शुरू हुए इस कार्यक्रम में देर रात तक लोगों की मौजूदगी बनी रही। दर्शकों ने विभिन्न राज्यों और स्थानीय संस्कृति पर आधारित भजनों तथा लोकनृत्यों का आनंद लिया। इस दौरान मंच से पेश किए गए अलग-अलग गीतों ने परिसर को भक्ति और देशभक्ति के रंग में रंग दिया। सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ 'गजानंद महाराज पधारो कीर्तन की तैयारी है' और 'जय जय गजानंद जी मारा हृदय करो प्रवेश' जैसी गणपति वंदनाओं के साथ हुआ। इसके बाद 'तेरी शरण में आकर धन्य हो गया' और 'श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में' जैसे भजनों पर लोगों ने उत्साह जताया। कलाकारों ने 'मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे' और' मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया उतारी' की संगीतमय प्रस्तुति दी। लोकदेवता बाबा रामदेव को समर्पित भजन 'बाबा रो घोड़लियो मने भाईग्यो' पर भी लोगों ने तालियां बजाईं। इसके साथ ही 'आवो नी पधारो म्हारे देश' और 'अजी हांसा मारे रुनक झुनक पायल बाजे सा' जैसे राजस्थानी लोकगीतों से स्थानीय संस्कृति की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम के उत्तरार्ध में देशभक्ति से ओतप्रोत गीतों का दौर शुरू हुआ। नगर परिषद आयुक्त द्वारा ''''प्रीत जहां की रीत सदा' की प्रस्तुति दी गई, जिस पर लोगों ने साथ गुनगुनाकर उत्साह बढ़ाया।'संदेशे आते हैं'''' और'महाराणा प्रताप कठे'''' जैसे गीतों ने माहौल को पूरी तरह देशभक्तिमय बना दिया। इस दौरान कलाकारों ने चरवी नृत्य और भवई नृत्य का प्रदर्शन किया। मंच पर सिर पर 21 मटके रखकर नृत्य करने तथा सिर पर बैलगाड़ी का पहिया रखकर उस पर तिरंगा लहराने जैसे करतब पेश किए गए। देशभक्ति के एक गीत के दौरान मंच के आह्वान पर सभी लोगों ने अपने मोबाइल की टॉर्च जलाकर हवा में लहराई। शहर के राजनगर मालीवाड़ा स्थित चारभुजा वाटिका में आयोजित गणपति महोत्सव के दौरान बुधवार रात सांस्कृतिक मंच पर भक्ति और रोमांच का अद्भुत संगम देखने को मिला। मेवाड़ मंच के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में गणपति बप्पा की प्रतिमा का विशेष शृंगार किया, जिसके दर्शन के लिए देर रात तक लोगों का तांता लगा रहा। महोत्सव में कलाकारों द्वारा प्रस्तुत देवी-देवताओं की सजीव और चल झांकियों ने पूरे वातावरण को धर्ममय बना दिया। इस दौरान हिंदी और राजस्थानी भजनों की लयबद्ध प्रस्तुतियों पर श्रद्धालुओं ने भाव नृत्य किया। तीन दिवसीय भक्ति संध्या के बाद अब शुक्रवार को गणपति प्रतिमा के विसर्जन के साथ इस महोत्सव का औपचारिक समापन किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने विभिन्न धार्मिक प्रसंगों पर आधारित आकर्षक झांकियां पेश कीं। शेर पर सवार मां शेरावाली और अनेक मुखों वाली कालका माता की झांकियों के दृश्य देखकर उपस्थित लोग रोमांचित हो उठे। इसके अतिरिक्त बाहुबली हनुमान, राम दरबार, राधा-कृष्ण तथा मोर-मोरनी के रूप में सजे कलाकारों ने मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। भजनों की श्रृंखला में ''''शेर पे सवार होकर आजा शेरांवालीए' और 'तेजल मारो लीलन सिणगारियो'''' जैसे लोकप्रिय गीतों पर हुई प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। महोत्सव के संचालन को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं और आयोजकों द्वारा व्यापक प्रबंध किए गए थे। शाम ढलते ही पंडाल में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी, जिसे देखते हुए व्यवस्थाएं संभाली गईं। मंच के प्रतिनिधियों के अनुसार उत्सव की कड़ी में शुक्रवार को प्रतिमा विसर्जन का कार्यक्रम निर्धारित है। विसर्जन यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विसर्जन के साथ ही इस वर्ष के बहुप्रतीक्षित गणेशोत्सव का समापन होगा।