श्री ओसवाल गौ सेवा सदन (पिंजरापोल) में रविवार को आधुनिक पशु-पक्षी चिकित्सालय का भूमि पूजन किया गया। चिकित्सालय का निर्माण 51 लाख रुपए की लागत से होगा। इसका पूरा खर्च दानदाता पुखराज प्रेमराज लुणावत और निखिल सुरभि मोदी परिवार की ओर से उठाया जाएगा। चिकित्सालय को अगले छह महीने में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। भूमि पूजन प्रन्यास प्रवर धर्मध्यान विजय महाराज और पूज्य काश्यप रत्न महाराज की मौजूदगी में हुआ। इस अवसर पर काश्यप रत्न महाराज ने कहा कि जीवदया जैनों की कुलदेवी है। उन्होंने दानदाता परिवार को आचार्य भगवंत हंसरत्न सुरिश्वर महाराज और आचार्य भगवंत तत्वदर्शन सुरिश्वर महाराज साहब की ओर से आशीर्वाद दिया। भूमि पूजन से पहले गोवंश को विशेष आहार खिलाया गया। इसके बाद गुरु भगवंतों ने गोवंश को मांगलिक पाठ सुनाया। बीमार और घायल पशु-पक्षियों को मिलेगा इलाज दानदाता प्रेमराज लुणावत मूल रूप से फलोदी के रहने वाले हैं और वर्तमान में मुंबई में रह रहे हैं। उन्होंने अपनी मातृभूमि से जुड़ाव और जीवदया की भावना से चिकित्सालय निर्माण के लिए सहयोग दिया है। प्रेमराज लुणावत ने बताया कि चिकित्सालय का उद्देश्य बीमार, असहाय और दुर्घटनाग्रस्त पशु-पक्षियों के साथ गोवंश को समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराना है। इससे पिंजरापोल में आने वाले घायल और बीमार जीवों को उपचार की सुविधा मिल सकेगी। जमीन खरीदने में भी मिला था सहयोग चिकित्सालय के निर्माण से पहले संघवी मनोरी बाई कंवरलाल विजय लाल पारसमल वैद परिवार (फलोदी-चेन्नई) ने इसके लिए जमीन खरीदने में आर्थिक सहयोग किया था। दानदाता परिवार की ओर से इससे पहले भी जीवदया से जुड़ा काम किया जा चुका है। प्रेमराज लुणावत के परिवार ने उषा लुणावत की स्मृति में 5.50 लाख रुपए की लागत से पक्षी घर का निर्माण कराया था। समाजबंधुओं ने लिया कार्यक्रम में हिस्सा कार्यक्रम में जैन समाज के अध्यक्ष घीसुलाल गोपाल गोलेछा, सुभाष कानूगा, रतनचंद भंसाली, प्रफुल बुरड़, पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. भगीरथ सोनी, डॉ. दिनेश, गौतम चंद कोठारी, विजयचंद वैद (कोयंबतूर), अशोक सराफ, धनराज लुणावत, मुकेश कोठारी, महावीर भंसाली, अर्जुनलाल गोलेछा, राकेश गोलेछा, मनोज बच्छावत, विकास पींचा, मनीष कानूगा, मदनचंद कोचर, अशोकचंद गोलेछा और रतनचंद बन्नासा जैन सहित कई समाजबंधु मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन पिंजरापोल कार्यकारिणी अध्यक्ष रवींद्र कुमार जैन और सचिव अंकित गोलेछा ने किया।