साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले म्यूल अकाउंट (किराए पर खाते) का नेटवर्क ध्वस्त करने के लिए जयपुर रेंज आईजी ने पहल करते हुए जांच अधिकारियों के लिए म्यूल अकाउंट इन्वेस्टिगेशन की एसओपी जारी की है। इसमें आईओ को 6 चरणों में 21 स्टेप्स में जांच पूरी करनी होगी। इसमें पैसा आने, खाता ऑपरेट करने और मास्टरमाइंड तक की जांच कर सबूत एकत्र करने होंगे। पुलिस की जांच केवल बैंक खाताधारक को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं रहेगी। आईओ को पैसे की पूरी दिशा, खाते का वास्तविक डिजिटल नियंत्रण, रिक्रूटर, फेसिलिटेटर और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचकर डिजिटल व दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने होंगे और पूरे सिंडिकेट को कोर्ट पहुंचाना होगा। आईपीएस नितिन चौधरी व आरपीएस विनय के नेतृत्व में टीम ने झारखंड व तेलंगाना सहित कई राज्यों की एसओजी की स्टडी की। फोरेंसिक जांच अनिवार्य होगी पहचान व प्राथमिक विश्लेषण: एनसीआरपी व समन्वय पोर्टल से खाते का प्रोफाइल, राज्य और शिकायतों का ब्योरा निकालना। बैंक में केवाईसी जांच : खाता किसने खुलवाया, बैंक तक कौन लेकर गया, खाता खुलवाते समय की सीसीटीवी की पड़ताल। डिजिटल जांच: सिम, IMEI, यूपीआई बाइंडिंग, ओटीपी एक्सेस का मिलान। ट्रांजेक्शन व मनी ट्रेल: ट्रांसफर राशि, एटीएम और चेक का टाइमलाइन विश्लेषण। नेटवर्क और भूमिका निर्धारण: खाताधारक, रिक्रूटर, ऑपरेटर, कैश हैंडलर और मुख्य सरगना की भूमिकाओं को प्रमाणित करना। साक्ष्य संरक्षण: इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का सर्टिफिकेशन, कस्टडी चेन मेंटेन करना और सुपरवाइजरी रिव्यू के बाद ही चालान। साइबर ठगी से संबंधित मामलों की जांच मजबूत करने के लिए झारखंड-तेलंगाना सहित कई राज्यों की स्टडी करने के बाद एसओपी तैयार की गई है। अलवर, दौसा, भिवाड़ी व खैरथल-तिजारा में साइबर ठगों के अड्डे बने हुए हैं। -राहुल प्रकाश, रेंज आईजी, जयपुर