पूर्णिमा विश्वविद्यालय में महिलाओं को नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए तैयार करने और कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसरों पर केंद्रित विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। 26 सितंबर को आयोजित यह कार्यक्रम आईसीएसएसआर, दिल्ली के प्रायोजन में पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होल्कर विशेष शोध परियोजना के तहत हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर की। घर से शुरू हो महिला सशक्तीकरण की पहल कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मंजू बाघमार रहीं। उन्होंने कहा कि देश और समाज का विकास तभी संभव है, जब सभी वर्गों का समान रूप से विकास हो। महिलाओं को सशक्त बनाने की शुरुआत घर से होनी चाहिए। बेटियों को बेटों के समान शिक्षा, अवसर और सम्मान मिलने पर ही समाज में वास्तविक बदलाव संभव है। सरकारी योजनाओं और नियमों की दी जानकारी विशिष्ट अतिथि एवं सरकारी विभाग की संयुक्त निदेशक डॉ. विजयश्री चोटिया ने महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उन्हें दूर करने के उपायों पर सत्र लिया। उन्होंने महिलाओं के नौकरी में उच्च पदों तक पहुंचने में मददगार सरकारी नियमों और व्यवस्थाओं की जानकारी दी। साथ ही महिलाओं और बालिकाओं के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में भी विस्तार से बताया। बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र की महिलाओं का सम्मान विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. सुरेश चंद्र पाढ़ी ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. चांदनी किरपलानी के साथ उन्होंने अतिथियों का अभिनंदन किया। इस दौरान बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। तीन पैनल चर्चाओं में साझा किए अनुभव कार्यशाला में तीन पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। इनमें विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिकाओं में काम कर रही महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने करियर में आगे बढ़ने के अवसरों, चुनौतियों और नेतृत्व तक पहुंचने के रास्तों पर चर्चा की। बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा क्षेत्र की पैनल चर्चा में यस बैंक की अंबिका बंसल, इंडियन बैंक की आंचल सिंह, एचडीएफसी बैंक की गरिमा जोशी और बैंक ऑफ बड़ौदा की दिव्या पंवार ने विचार रखे। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की पैनल चर्चा में डॉ. कृति तांबी, डॉ. सोनिका शर्मा, अपर्णा झा और तप्ती भट्टाचार्य शामिल हुईं। वहीं, उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी पर आयोजित तीसरी पैनल चर्चा में डॉ. रश्मि जैन, डॉ. कृष्णा गुप्ता, डॉ. ममता जैन और डॉ. रश्मि चतुर्वेदी ने अपने अनुभव और विचार साझा किए।