साकेत साहित्य संस्थान की रजत जयंती पर प्रकाशित पुस्तक मेरा गाँव मेरा गौरव की प्रति जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को भेंट की। संस्थान के प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा, एडीएम राजकुमार कस्वा, एसडीएम ओम प्रभा से उनके कार्यालय में मुलाकात की। संस्थान अध्यक्ष वीणा वैष्णव ने बताया कि प्रतिनिधि मंडल ने पुस्तक भेंट की। संस्थान की 25 साल की साहित्यिक यात्रा बताई। पुस्तक के उद्देश्य पर बात रखी। अधिकारियों ने पहल की सराहना की। महासचिव कमल अग्रवाल ने कहा कि मेरा गाँव मेरा गौरव केवल पुस्तक नहीं है। यह अपनी माटी, गांवों की स्मृतियों, लोकजीवन, लोक संस्कृति, जड़ों से जुड़े गौरव को शब्दों में संजोने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि गांव केवल भौगोलिक इकाई नहीं है। यह हमारी सभ्यता और संस्कारों की पहली पाठशाला है। उपाध्यक्ष नारायणसिंह राव ने कहा कि साहित्य और प्रशासन का यह आत्मीय मिलन सकारात्मक संवाद का उदाहरण है। साहित्य समाज की संवेदनाओं को स्वर देता है। प्रशासन उन संवेदनाओं को जन-जीवन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। नई पहल की जानकारी मीडिया प्रभारी अन्नू राठौड़ रुद्रांजली ने दी। इस दौरान वीणा वैष्णव, नारायणसिंह राव, कमल अग्रवाल, पुस्तक के संपादक डॉ. संपतलाल रेगर, सह संपादक माधवलाल जटिया मौजूद थे।