राजस्थान में जैसलमेर के बुजुर्ग किसान पुनाराम माली का फोन अचानक बजा। बैंक वालों का कॉल था। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की बकाया किस्त जमा कराने के लिए पूछ रहे थे। पुनाराम ने हड़बड़ाते हुए जवाब दिया- थोड़ा टाइम दे दीजिए। जल्दी भर दूंगा। इस बार बारिश से फसल चौपट हो गई। चांदन के पुनाराम ने 60 बीघा में मूंग-बाजरा बोया। अब वहां दाना नहीं सूखे डंठल थे। नागौर के भगवानपुरा के किसान चेनाराम यादव शहर में ग्रेड थर्ड टीचर की तैयारी कर रही बेटी को महीने का खर्च नहीं भेज पाए। इतना ही नहीं, बेटी को खेत में कटाई के लिए बुलाना पड़ा। क्योंकि मजदूर 400-500 रुपए दिन के मांग रहे हैं। फसल ही नहीं बची तो यह मजदूरी कर्ज पर कर्ज है। जैसलमेर, नागौर, पाली, जालोर… राजस्थान के कई जिलों में कमजोर मानसून की मार की ऐसी कहानियां मिल जाएंगी। बर्बाद हुई फसलें आवारा पशुओं को चरा रहे हैं। राजस्थान अकाल और किसान आर्थिक संकट की चपेट में हैं। खेतों तक पहुंचकर भास्कर ने किसानों का दर्द जाना। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… जोधपुर : मूंगफली में दाना पड़ने का वक्त, लेकिन पानी नहीं मिल रहा जोधपुर जिले के तिंवरी के किसान ओमप्रकाश परिहार ने बताया कि अभी मूंगफली में दाना पड़ने का समय है। जल्दी बारिश नहीं हुई और फसल को पानी नहीं मिला तो दाना कमजोर रहेगा और पैदावार घट जाएगी। ओमप्रकाश बोले- 20 बीघा में करीब 1 से 1.40 लाख रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है। ओमप्रकाश ने पैसा केसीसी लोन से जुटाया था। थोड़ी आगे पुनाराम चाैधरी का खेत था। उन्होंने बताया अभी कपास में टिंडे आने और पकने का समय है। कम बारिश और तेज गर्मी से पौधे मुरझा रहे हैं। पानी कम होने से समय पर सिंचाई नहीं हो पा रही। अब इसके चलते टिंडों के विकास और अंतिम उत्पादन दोनों पर असर पड़ने वाला है। पुनाराम ने 20 बीघा में कपास बोया। पैसा केसीसी लोन से जुटाया। खाद, बीज, दवा, मजदूरी, सिंचाई, ट्रैक्टर समेत अन्य खर्च मिलाकर 20 बीघा में 4 लाख रुपए से अधिक खर्च हो चुके हैं। कुल उत्पादन करीब 40 से 50 क्विंटल रह सकता है। 1 लाख से ज्यादा का नुकसान हो सकता है। जैसलमेर : पहले आंधी, रेत; अब सूखा कर रहा परेशान जैसलमेर के किसान पुनाराम माली ने बताया कि इस बार पहले आंधी, फिर रेतीले तूफान और कमजोर मानसून की मार ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया है। ब्याज और केसीसी पर लोन लेकर 2.30 लाख लगाकर जून में 60 बीघा में मूंग-बाजरा बाेया था। जो थोड़ी फसल उगी, उसे रेत ने दबा दिया। बारिश नहीं होने से अब अक्टूबर में ही कई खेत चारे लायक भी नहीं बचे हैं। इस बार लागत का 25 फीसदी भी वसूल नहीं हो पाएगा। जालोर : ढाई लाख लगाए, हाथ में पांच-आठ किलो मूंग आहोर के किसान नरसाराम मीणा ने बताया कि 25 बीघा में मूंग बोया था। बुआई, खाद, डीजल और मजदूरी मिलाकर ढाई लाख का खर्चा आया था। अब हाथ में 5 से 8 किलो मूंग लगा है। पिछले 10-15 साल में मैंने खराबे की ऐसी मार नहीं देखी। आहोर के ही किसान गणपतराम ने बताया कि मैंने और मेरे भाई ने मिलकर 150 बीघा में बुआई की थी। बारिश कम होने से पूरी फसल नष्ट हो गई है। 80 बीघा में मूंग, 30 बीघा में बाजरा, 9 बीघा में तिल और 31 बीघा में अरंडी की बुआई की थी। ढाई लाख का खर्चा आया था। कम बारिश से फसल की ऐसी बर्बादी हुई कि सिर्फ चारा मिल रहा था। उसे कटवाते तो मजदूरी भी महंगी पड़ती। ऐसे में खेत में आवारा पशुओं को छोड़ दिया है। नागौर : बेमौसम बरसात ने किसानों की हालात की खराब की नागौर के बीजाथल के रहने वाले किसान नौरतराम ने बताया कि 140 बीघा में ग्वार, मूंग और बाजरा बोया था। 3.60 लाख का खर्चा आया था। कुछ पैसा घर में पड़ा था तो कुछ रकम साहूकारों व कोऑपरेटिव बैंक के लोन से मिली थी। बढ़िया फसल हुई थी। काट कर खेत में रखा था। इसी दौरान अचानक हुई बेमौसम बरसात ने उनकी पूरी मेहनत और सपनों पर पानी फेर दिया। अब हालत ये है कि 50 हजार की पैदावार भी बड़ी मुश्किल से हाथ लगेगी। नागौर के ही लुंगिया के रहने वाले किसान चेनाराम पांडर ने बताया कि बेमौसम हुई बारिश ने खेत में कपास की पूरी फसल को बर्बाद कर दिया है। कल तक लहलहा रही फसल अब पशुओं के खाने के लायक भी नहीं बची है। बाजरा, मूंग, तिल और ग्वार सूखा तिंवरी (जोधपुर) के किसान और भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री मेघाराम तरड़ ने कहा कि बाजरा, मूंग, तिल और ग्वार सूख गए हैं। फसल कटाई के बाद नुकसान का सही से आकलन नहीं बनेगा। सरकार को चाहिए कि खराबे की तुरंत गिरदावरी हो। देरी हुई तो फसल बीमा और मुआवजा दोनों अटकेंगे। जिले को तत्काल अकालग्रस्त घोषित किया जाना चाहिए। 40 बीघा में मूंग बोया था, अब खेत चरागाह है किसान भंवरूराम ने बताया- 40 बीघा में मूंग बोया था, थोड़ा बाजरा भी। सूखे ने पूरी फसल खा ली। काटने में जो खर्च आएगा, वह मंडी में नहीं निकलेगा, इसलिए खड़ी फसल मवेशियों के लिए छोड़ दी। उत्पादन घटेगा, दाम बढ़ सकते हैं राजस्थान में इस बार का खरीफ लक्ष्य 165 लाख हेक्टेयर का था पर कमजोर मानसून के कारण करीब 154 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई। बाजरा, ग्वार, मूंग, मोठ और सोयाबीन की कमी से माल दूसरे राज्यों से मंगाना पड़ सकता है। दाम बढ़ेंगे। चारा महंगा होगा। दूध और घी पर भी असर पड़ेगा। 10 साल बाद राजस्थान में ऐसे हालात पिछली बार साल 2014-15 में लगभग प्रदेश के हर जिले में बारिश की कमी के चलते भयंकर सूखा पड़ा था। तब हजारों पशु अकाल की भेंट चढ़ गए थे। इससे पहले साल 2009 में प्रदेश के 27 जिलों के 33 हजार से अधिक गांव सूखे की चपेट में थे। इस बार भी अकाल का संकट खड़ा हो गया है। बारिश सामान्य से भी करीब 19 फीसदी कम रही। पटवारियों की टीम राज्य से प्रभावित इलाकों में सर्वे में जुटी हुई है। सभी जिलों की गिरदावरी रिपोर्ट (फसल खराबा और अकाल के हालात, जिन्हें सरकारी भाषा में अभावग्रस्त क्षेत्र कहा जाता है) कलेक्टरों के जरिए राजस्व विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग तक पहुंचेगी। फसल खराबे और सूखे के हालात को लेकर 15 अक्टूबर के बाद रिपोर्ट सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के बाद जारी होगी अभावग्रस्त जिलों-तहसीलों की लिस्ट सरकार इस रिपोर्ट के बाद अभावग्रस्त (सूखा) जिलों और तहसीलों की सूची जारी करेगी। इसके बाद सूखा प्रभावित जिलों की एग्जेक्ट संख्या कितनी है, ये स्थिति साफ हो जाएगी। शुरुआती सर्वे से साफ है कि इस बार 11 से अधिक जिले सूखे की चपेट में हैं। सबसे ज्यादा खराब हालत पाली, जैसलमेर और जालोर जिले में हैं। यहां की ज्यादातर तहसीलें प्रभावित हैं और किसानों का काफी नुकसान हुआ है। तीनों जिलों में सामान्य से 50 फीसदी तक कम बारिश हुई है। वहीं बांसवाड़ा, सिरोही, हनुमानगढ़, उदयपुर, राजसमंद, बालोतरा, भीलवाड़ा और जोधपुर में भी कई तहसीलों में कम बरसात के कारण अकाल के हालात बने हैं। … मानसून से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान- 10 साल के सबसे बड़े अकाल का खतरा:11 से ज्यादा जिले सूखे की चपेट में, 50% से कम बारिश, चलानी पड़ेगी पानी की ट्रेन कमजोर मानसून के कारण राजस्थान के सामने 10 साल के सबसे बड़े अकाल का खतरा खड़ा हो गया है। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के सूत्रों के अनुसार 11 जिले सूखे की चपेट में हैं। पूरी खबर पढ़िए…