राजस्थान में टैक्स चोरी, कम कर भुगतान, अपात्र इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के इस्तेमाल और रिटर्न में गड़बड़ियों के खिलाफ वाणिज्यिक कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने 15 से 17 सितंबर के बीच 11 प्रतिष्ठानों का सर्वे और निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में करीब 5.55 करोड़ रुपए की देनदारी सामने आई है। वहीं, संबंधित करदाताओं ने अब तक 1.49 करोड़ रुपए से अधिक की राशि नकद जमा अथवा ITC रिवर्सल के रूप में जमा की है। विभाग के अनुसार कई मामलों में दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं, जबकि आगे की जांच के लिए संबंधित करदाताओं को समन भी जारी किए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभी सामने आई कर देनदारी प्रारंभिक जांच पर आधारित है। रिकॉर्ड के विस्तृत सत्यापन के बाद वास्तविक देनदारी तय होगी। जयपुर के CLAYB.ORN पर GST और VAT में गड़बड़ी जयपुर के वैशाली नगर स्थित क्लेबॉर्न (गुड्डू हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड) रेस्टोरेंट में 16 सितंबर को निरीक्षण किया गया। जांच में सामने आया कि फरवरी 2026 से GST का भुगतान नहीं किया गया है। करीब 20 लाख रुपए की संभावित GST देनदारी के विरुद्ध 10 लाख रुपए नकद जमा किए। मामले में VAT-14 नोटिस भी जारी किया गया है। दो रेस्टोरेंट में टैक्स रेट को लेकर जांच चौड़ा रास्ता स्थित सम्राट रेस्टोरेंट के दोनों प्रतिष्ठानों की जांच में GST पोर्टल पर 1 प्रतिशत की दर से टैक्स जमा किए जाने की जानकारी सामने आई। विभाग के अनुसार संबंधित रेस्टोरेंट पर 5 प्रतिशत कर दर लागू होने की स्थिति में विस्तृत सत्यापन जरूरी है। दोनों प्रतिष्ठानों में करीब 10-10 लाख रुपए की संभावित कर देनदारी का आकलन किया गया है। होटल-रेस्टोरेंट और स्पा में 55 लाख का ITC रिवर्स यश रियलमार्ट प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित दी आऊरियम होटल, मिनोरी रेस्टोरेंट और ओलिंपिया स्पा और वेलनेस सेंटर की जांच में अपात्र ITC के उपयोग और सेट-ऑफ का मामला सामने आया। करीब 1 करोड़ रुपए की संभावित राजस्व देनदारी के विरुद्ध करदाता ने कार्रवाई के दौरान 55 लाख रुपए का ITC रिवर्स किया। दस्तावेजों की विस्तृत जांच के लिए 23 सितंबर को उपस्थित होने का समन जारी किया गया है। प्रकाश लाइटिंग में 30.37 लाख रुपए जमा प्रकाश लाइटिंग में कार्रवाई के दौरान 18.10 लाख रुपए का ITC रिवर्स किया गया, जबकि 12.27 लाख रुपए नकद जमा किए गए। इस तरह कुल 30.37 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। विभाग अब प्रतिष्ठान की पुस्तकों, खरीद बिलों और अन्य रिकॉर्ड की जांच कर रहा है। सॉफ्टस्टारपर 1.76 करोड़ की संभावित देनदारी जयपुर स्थित सॉफ्टस्टार इंटेलिजेंट ट्रांसजक्शन सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड के GST रिटर्न की जांच में विभिन्न विसंगतियां सामने आईं। प्रारंभिक जांच में करीब 1.76 करोड़ रुपए की संभावित कर देनदारी सामने आई। इसके विरुद्ध करदाता ने 7.54 लाख रुपए स्वेच्छा से जमा किए हैं। कन्हैया ट्रेडर्स में 11.50 लाख जमा बिलासपुर और भीलवाड़ा क्षेत्र के कन्हैया ट्रेडर्स के निरीक्षण में उपलब्ध ITC के करीब 97 प्रतिशत उपयोग को लेकर जांच की गई। कार्रवाई के दौरान स्टॉक में भी अंतर पाया गया। विभाग के अनुसार करदाता ने 11.50 लाख रुपए जमा किए। श्रीगंगानगर में 17.59 लाख की राशि जमा श्रीगंगानगर के इलेक्ट्रॉनिक्स प्रतिष्ठान श्री गोविंदम के किताब में दर्ज रिकॉर्ड और असल स्थिति में अंतर मिला। इस दौरान करीब 85 लाख रुपए मूल्य का स्टॉक पाया गया। श्री गोविंदम ने 17.59 लाख रुपए स्वेच्छा से जमा किए। इसमें CGST और SGST की राशि 8.795-8.795 लाख रुपए शामिल है। HMT STEEL INDUSTRIES में 1.12 करोड़ का कर अंतर बीकानेर स्थित HMT STEEL INDUSTRIES के निरीक्षण में घोषित और भुगतान की गई कर देनदारी में बड़ा अंतर सामने आया। जनवरी से मार्च 2026 और जून 2026 की एंट्रियों की जांच में करीब 1.12 करोड़ रुपए की कर देनदारी का अंतर सामने आया। विभाग द्वारा रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की आगे जांच की जा रही है। अलवर में फर्जी फर्मों से ITC लेने के मामले अलवर स्थित अकांशा इंजीनियरिंग वर्क्स में निरस्त और फर्जी फर्म से ITC लिए जाने का मामला सामने आया। करीब 16.35 लाख रुपए की संभावित देनदारी के विरुद्ध करदाता ने 7.15 लाख रुपए जमा किए। इसमें 6.35 लाख रुपए नकद और 80 हजार रुपए ITC रिवर्सल शामिल है। इसी तरह अभि इंजीनियरिंग वर्क्स में अब-इनिशियो कैंसिल फर्मों से करीब 9.77 लाख रुपए का ITC लिए जाने की जानकारी सामने आई। मामले में दस्तावेज और बही-खातों के साथ 28 सितंबर को उपस्थित होने के लिए समन जारी किया गया है। विस्तृत जांच के बाद तय होगी वास्तविक देनदारी वाणिज्यिक कर विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी मामलों में सामने आई विसंगतियां प्रारंभिक जांच पर आधारित हैं। पुस्तकों, बिलों, रिटर्न, ITC और अन्य अभिलेखों के विस्तृत सत्यापन के बाद वास्तविक कर देनदारी निर्धारित की जाएगी। जहां भी अनियमितता प्रमाणित होगी, वहां CGST/RGST Act और संबंधित VAT कानूनों के प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।