राजस्थान हाइकोर्ट ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए विस्थापित प्रवासियों को बड़ी राहत देते हुए महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने जोधपुर विकास प्राधिकरण और नगर निगम को निर्देश दिए कि 'विनोबा भावे नगर योजना' के तहत विस्थापितों को रियायती दर पर दिए जाने वाले आवासीय भूखंडों का भुगतान आसान मासिक किश्तों या 'हायर-पर्चेज' समझौते के आधार पर करने की सुविधा दी जाए। साथ ही हाईकोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि विस्थापित परिवारों के बच्चों को बिना किसी अनिवार्य पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड) के सरकारी स्कूलों में तत्काल प्रवेश दिया जाए। न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने विस्थापित हिंदू पुनर्वास समिति द्वारा दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया। किश्तों में रुपए चुकाने की थी मांग याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए बताया गया कि पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न और विषम परिस्थितियों के कारण कई परिवार भारत में शरण लेकर राजस्थान में रह रहे हैं। प्रशासन ने इन विस्थापितों के पुनर्वसन के लिए 'विनोबा भावे नगर योजना' के तहत भूखंड देने की योजना बनाई है, लेकिन इन परिवारों की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि वे एकमुश्त राशि जमा करने में असमर्थ हैं। याचिकाकर्ता समिति ने मांग रखी कि आवासन मंडल की तर्ज पर इन प्रवासियों को भी किश्तों में राशि चुकाने की छूट दी जानी चाहिए, ताकि उनके पास अपना आशियाना हो सके। किश्तों में भुगतान की प्रक्रिया लागू करने का आदेश ​सुनवाई के दौरान राज्य सरकार एवं विकास प्राधिकरण के अधिवक्ताओं ने विस्थापितों की कमजोर आर्थिक स्थिति को स्वीकार किया। उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि योजना के तहत रियायती दर तो निर्धारित की गई है, परंतु किश्तों या हायर-पर्चेज की शर्त शामिल नहीं थी। ​हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए कहा कि मानवीय दृष्टिकोण और न्याय हित को ध्यान में रखते हुए विस्थापितों को किश्तों में भुगतान का विकल्प मिलना चाहिए। अदालत ने संबंधित विभागों को राज्य सरकार के सक्षम अधिकारियों से आवश्यक मंजूरी लेकर इस प्रक्रिया को चार सप्ताह के भीतर लागू करने का निर्देश दिया। बच्चों की शिक्षा में नहीं आएगी आधार की बाधा ​याचिका में एक अन्य प्रमुख मुद्दा विस्थापित बच्चों की शिक्षा से जुड़ा था। कोर्ट को बताया गया कि आधार कार्ड न होने के कारण कई बच्चों को सरकारी विद्यालयों में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। ​इस पर हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि किसी भी विस्थापित बच्चे को आधार न होने के आधार पर सरकारी स्कूलों में प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा। प्रशासन को इस आदेश का अनुपालन चार सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।