राजस्थान हाईकोर्ट ने एक रिपोर्टेबल जजमेंट देते हुए कहा- तलाक के बाद बच्चे के पासपोर्ट पर पिता का नाम लिखना जरूरी नहीं है। अगर बच्चे की कस्टडी पूरी तरह से मां के पास है और पिता ने बच्चे से सभी रिश्ते खत्म कर लिए तो पासपोर्ट पर केवल मां का नाम ही पर्याप्त है। जस्टिस मनीष शर्मा की अदालत ने बच्चे की ओर से मां की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने पासपोर्ट कार्यालय के 13 मई 2024 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि पासपोर्ट रिन्यू कराने के लिए पिता का नाम बताते हुए शपथ-पत्र देना होगा। अदालत ने पासपोर्ट अथॉरिटी को आदेश दिया कि वह एक महीने में पिता का बिना नाम लिखे, केवल मां के नाम के साथ बच्चे का पासपोर्ट रिन्यू करके जारी करे। पिता के नाम के बिना पहले जारी किया था पासपोर्ट एडवोकेट अर्चित बोहरा ने बताया- याचिकाकर्ता 14 साल का बच्चा है। उसके माता-पिता की शादी 6 जून 2010 को हुई थी। बच्चे का जन्म 24 दिसंबर 2011 को हुआ। पति-पत्नी के बीच मतभेद के चलते आपसी सहमति से तलाक हो गया। 14 अक्टूबर 2017 की तलाक की डिक्री में बच्चे की पूरी कस्टडी मां को दे दी गई। इसके बाद मां ने साल 2019 में बच्चे का पासपोर्ट सिंगल पैरेंट के रूप में बनवाया, जो 7 मई 2024 तक वैध था। इसमें केवल मां का नाम दर्ज था। पासपोर्ट की अवधि खत्म होने से पहले मां ने 5 अप्रैल 2024 को उसके रिन्यूअल के लिए आवेदन किया। तब पासपोर्ट ऑफिस ने 13 मई 2024 को आदेश जारी कर कहा कि पासपोर्ट रिन्यू कराने के लिए पिता का नाम बताते हुए शपथ-पत्र देना होगा। बोहरा ने कहा- राजस्थान हाईकोर्ट ने पासपोर्ट को लेकर ऐसा पहली बार आदेश दिया है। सरकार का तर्क- तलाक के बाद भी माता-पिता का नाम जरूरी सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि पासपोर्ट मैन्युअल के प्रावधानों और विदेश मंत्रालय के 28 फरवरी 2023 के स्पष्टीकरण के अनुसार बच्चे के मामले में उसके माता-पिता का नाम उपलब्ध कराना जरूरी है। भले ही बाद में उनका तलाक हो गया हो। सरकार की ओर से कहा गया कि पिता का नाम तभी हटाया जा सकता है, जब पिता अज्ञात हो। बच्चे के जन्म के बाद उसका कोई संपर्क न रहा हो या पिता ने मां-बच्चे से संबंध समाप्त कर लिया हो। इस मामले में पिता की पहचान स्पष्ट है, इसलिए उसका नाम मांगना नियमों के तहत है। कोर्ट ने कहा- अफसरों का रवैया जरूरत से ज्यादा तकनीकी कोर्ट ने पासपोर्ट अधिकारियों के रवैए पर टिप्पणी करते हुए कहा- उन्होंने इस मामले में हाइपर टेक्निकल और कठोर अप्रोच अपनाई है, जबकि बच्चे की कस्टडी पूरी तरह से मां के पास है। पहले भी पिता का नाम दर्ज किए बिना पासपोर्ट जारी किया जा चुका है। इसके बाद 28 फरवरी 2023 के स्पष्टीकरण को मशीनी तरह से लागू करके पिता का नाम मांगना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा- अधिकारियों का यह रुख पासपोर्ट रूल्स में अपनाए गए लचीले और मामले के तथ्यों पर आधारित दृष्टिकोण के विपरीत है।