पर्यटन नगरी उदयपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में टूरिज्म को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से राजस्थान भू-राजस्व नियम-2026 जारी किए गए हैं। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन इकाइयां (रिसॉर्ट, होटल या होम स्टे) स्थापित करने पर भूमि रूपांतरण का प्रीमियम शुल्क अब नहीं देना होगा। यह नियम 2 नवंबर से लागू होंगे। उदयपुर के सायरा, झाड़ोल, गोगुंदा, डबोक जैसे ग्रामीण इलाकों में इसका सीधा फायदा मिलेगा। अब तक भारी प्रीमियम के कारण निवेशक ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोजेक्ट लगाने से कतराते थे, लेकिन इस छूट से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी व युवाओं को रोजगार मिलेगा। जानिए नियम, शर्तें और फायदे 100% प्रीमियम छूट: अनुसूची-3 के अनुसार पर्यटन इकाइयों को भूमि उपयोग परिवर्तन पर प्रीमियम शुल्क से पूरी राहत मिलेगी। विभाग की स्वीकृति जरूरी: छूट का लाभ केवल उन्हीं प्रोजेक्ट्स को मिलेगा, जो राजस्थान या केंद्र सरकार के पर्यटन विभाग से स्वीकृत होंगे। अन्य एनओसी अनिवार्य: प्रीमियम छूट का मतलब निर्माण की अन्य मंजूरियों से छूट नहीं है। लेआउट, फायर सेफ्टी, पर्यावरण स्वीकृति अनिवार्य रहेंगी। कृषि स्थिति में वापसी: नियम-9 के तहत यदि कोई काश्तकार बाद में जमीन को फिर से कृषि उपयोग में दर्ज कराना चाहता है तो एसडीओ को आवेदन कर सकता है। मंजूरी से लेकर सबकुछ एसडीओ के हाथ कृषि भूमि को पर्यटन इकाई में बदलने की अनुमति जारी करेंगे। ऑनलाइन आवेदनों में शुल्कों की जांच कर कम पाए जाने पर नोटिस देंगे। कलेक्टर की अध्यक्षता वाली लेआउट समिति में अनिवार्य सदस्य होंगे। नियम तोड़ा या धोखाधड़ी की तो जुर्माना बिना स्वीकृति उपयोग पर पटवारी की रिपोर्ट पर एसडीओ द्वारा 4 गुना जुर्माना वसूला जाएगा। गलत जानकारी पर अनुमति निरस्त कर प्रीमियम का 2 गुना जुर्माना लगेगा। स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा, रोजगार भी बढ़ेगा पर्यटन विभाग की उपनिदेशक शिखा सक्सेना के अनुसार इस बदलाव से सायरा, झाड़ोल, गोगुंदा व डबोक जैसे इलाकों में नए प्रोजेक्ट्स आएंगे। लागत घटने से रिसॉर्ट्स व होम स्टे बनेंगे। इससे पर्यटकों को नए डेस्टिनेशन मिलेंगे, ग्रामीणों की आय बढ़ेगी और स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा।