राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव की सरगर्मियां तेज होते ही कस्बों और गांवों में चुनावी रंगत गहराने लगी है। इस बार चौपाल और दुकानों पर चर्चा की बजाय सोशल मीडिया पर चुनावी प्रचार ज्यादा नजर आ रहा है। इसमे AI की मदद से तैयार फोटो-वीडियो की भरमार है। लंबे समय बाद हो रहे पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है। सरपंचों का कार्यकाल खत्म होने के बाद अटके विकास कार्यों को फिर गति मिलने की उम्मीद जगी है, लेकिन इस बार गांव की सरकार चुनने का तरीका ही पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। गांवों में चुनावी प्रचार अब चौपाल से निकलकर सीधे मोबाइल की स्क्रीन तक पहुंच गया है। पोस्टर-बैनर की जगह AI वीडियो ज्यादा काम में लिए जा रहे है। आरक्षण की लॉटरी निकलने और चुनाव तारीखों के ऐलान के बाद कई ग्राम पंचायतों में संभावित उम्मीदवार मैदान में उतर आए हैं। खास बात यह है कि इस बार बड़ी संख्या में सरपंच सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हुई हैं, जिससे गांवों की राजनीति में महिला भागीदारी बढ़ेगी। मिनटों में तैयार हो रहा विकास का मॉडल: कुछ साल पहले तक चुनाव प्रचार पोस्टर, बैनर, पर्चे और चौपालों तक ही सीमित थे। ग्रामीण क्षेत्रों में बैनर-पोस्टर छपवाने के लिए शहर जाना पड़ता था, जिसमें दो-दो दिन लग जाते थे। शाम ढलते ही चौपाल पर बैठक जमती थी। पंच-सरपंच चुनाव में चुनाव चिन्ह बताने के लिए घर-घर जाना पड़ता था। उम्मीदवारों के पास मतदाताओं तक पहुंचने और अपना चिन्ह समझाने के लिए कुछ ही घंटों का समय होता था। अब यह पारंपरिक तरीका पीछे छूटता दिख रहा है। जिस विकास को गांव की गलियों में देखने में वर्षों लगते थे, उसकी तस्वीर अब कुछ मिनटों में AI वीडियो के जरिए मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई जा रही है। उम्मीदवार गांव के विकास का मॉडल AI से बनाकर वोट मांग रहे हैं। सड़क, पानी, स्कूल, स्ट्रीट लाइट और स्वच्छता जैसे वादों को 3D वीडियो में पेश किया जा रहा है। प्रचार का नया तरीका बना सोशल मीडिया उम्मीदवार और उनके समर्थक सोशल मीडिया को प्रचार का नया तरीका बना रहे हैं। चंद मिनटों में ही व्हाट्सऐप ग्रुप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर प्रचार की बाढ़ आ जाती है। AI से बने पोस्टर, बैनर और वीडियो चंद सेकंड में लोगों के मोबाइल तक पहुंच रहे हैं। बारां जिले के राजपुर ग्राम पंचायत के सरपंच प्रत्याशी रवि सोनी का कहना है, "सोशल मीडिया की वजह से चुनाव प्रचार सरल हो गया है। पहले बैनर-पम्पलेट छपवाने पड़ते थे, खर्चा अधिक होता था, लेकिन AI ने सब आसान कर दिया है। कम लागत में ज्यादा लोगों तक पहुंच बन रही है।" युवा मतदाता मोबाइल पर परख रहा प्रत्याशी के विजन: वहीं मतदाताओं का कहना है कि अब प्रत्याशियों का पता ही सोशल मीडिया से चल रहा है। विकास के दावे भी वहीं किए जा रहे हैं। बुजुर्ग भले ही आज भी चौपाल पर चर्चा को तरजीह देते हों, लेकिन युवा मतदाता मोबाइल पर ही प्रत्याशी के विजन को परख रहा है। तकनीक की एंट्री ने गांव की राजनीति का तरीका जरूर बदल दिया है, मोबाइल स्क्रीन पर दिख रहा यह डिजिटल विकास धरातल पर कितना काम कर पाता है यह आने वाले चुनावों में पता चलेगा।