जयपुर की राजस्थान यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को विश्व मेंटल हेल्थ डे पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। मनोविज्ञान विभाग की ओर से हुए कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने कहा- पढ़ाई, प्रतिस्पर्धा और दूसरी चुनौतियों के बीच स्टूडेंट्स के मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा- परेशानी होने पर अपनी बात खुलकर कहनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर मदद लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए। कुलगुरु ने कहा- कई बार किसी की बात ध्यान से सुनने से भी उसकी परेशानी कम हो सकती है। कार्यक्रम में अलग-अलग कॉलेजों और स्कूलों के करीब 250 स्टूडेंट्स शामिल हुए। इस दौरान पोस्टर मेकिंग, भाषण, जागरूकता रैली और साइकोड्रामा के जरिए मेंटल हेल्थ को लेकर जागरूकता का संदेश दिया गया। शिक्षकों को भी विद्यार्थियों की परेशानी समझने की जरूरत कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने कहा- शिक्षकों को विद्यार्थियों की मनस्थिति समझनी चाहिए। कक्षा में पढ़ाई के अलावा दूसरे विषयों पर भी बात होनी चाहिए, ताकि विद्यार्थी अपनी परेशानी साझा कर सकें। उन्होंने कहा- आसपास का माहौल सकारात्मक रखना जरूरी है। किसी के बात करने पर उसे ध्यान से सुनना चाहिए। विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी ने कहा- कार्यक्रम का उद्देश्य मेंटल हेल्थ को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना और इससे जुड़े भ्रम दूर करना है। तनाव, चिंता और भावनात्मक परेशानियों पर खुलकर बात होनी चाहिए। मेंटल हेल्थ को केवल बीमारी से जोड़कर देखने के बजाय इसे जीवन और खुशहाली का जरूरी हिस्सा समझना चाहिए। अच्छी दिनचर्या और व्यायाम भी जरूरी कार्यक्रम में पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मनिका मोहन ने विद्यार्थियों को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने और खुश रहने का प्रयास करने की सलाह दी। वहीं प्रो. ए.वी.एस. मदनावत ने कहा- अच्छा भोजन और नियमित व्यायाम करने से मन और दिमाग को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है। कुलगुरु प्रो. सारस्वत, विभागाध्यक्ष प्रो. पुरी और अन्य अतिथियों ने रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। विद्यार्थियों ने पोस्टर और दूसरी गतिविधियों के जरिए मेंटल हेल्थ को लेकर जागरूकता का संदेश दिया। कार्यक्रम के आयोजन और समन्वय में डॉ. ज्योति की भूमिका रही। इस दौरान प्रो. रामवतार शर्मा, डॉ. चंद्राणी सेन, डॉ. तेजेंदर कौर, प्रो. रश्मि चौधरी, प्रो. उमा मित्तल और डॉ. आशिमा कट्टा आदि मौजूद रहे।