राजसमंद जिले में सितंबर माह के दौरान भी बारिश नहीं हुई है। 29 सितंबर तक जिले में औसतन महज 49 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इस दौरान जिले में औसत रूप से 12 दिन ही बारिश हुई। सबसे अधिक 8 दिन बारिश नाथद्वारा में हुई, जबकि सबसे कम केवल 3 दिन बारिश गिलूंड में रिकॉर्ड की गई। कम बारिश के कारण किसानों का काफी नुकसान होने का डर बना हुआ है। फिलहाल लोगों की नजर अब जाते मानसून पर टिकी हुई है। 1 जून से अब तक 342 मिमी बारिश सितंबर में सर्वाधिक 75 मिमी बारिश भीम तहसील में हुई, जबकि देवगढ़ तहसील में सबसे कम 17 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं 1 जून से अब तक जिले में औसतन 342 मिमी बारिश हुई है। इस अवधि में सर्वाधिक 521 मिमी बारिश गिलूंड में और सबसे कम 219 मिमी बारिश कुंवारिया में रिकॉर्ड की गई। एक भी मेन बांध ओवरफ्लो नहीं कम बारिश के चलते किसानों में मायूसी है। वहीं जिले के 25 प्रमुख बांधों में भी पानी की पर्याप्त आवक नहीं हो पाई है। खास बात यह है कि अब तक एक भी प्रमुख बांध ओवरफ्लो नहीं हुआ है। जिससे आगामी समय में पेयजल संकट की चिंता बढ़ गई है। राजसमंद शहर की प्रमुख जीवन रेखा राजसमंद झील में वर्तमान में 19.05 फीट पानी है। झील का कुल गेज 30 फीट है और ओवरफ्लो के लिए अभी 11 फीट पानी की जरूरत है। झील की कुल भराव क्षमता 3786 एमसीएफटी है। इससे पेयजल आपूर्ति के साथ आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों में सिंचाई के लिए भी पानी दिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल के प्रमुख स्रोत बाघेरी नाका में 32.80 फीट के कुल गेज के मुकाबले वर्तमान में 15.15 फीट पानी है। नाथद्वारा के प्रमुख पेयजल स्रोत नंदसमंद बांध में 32 फीट के कुल गेज के मुकाबले 13.70 फीट पानी मौजूद है। अब जिलेवासियों और किसानों की नजर लौटते मानसून पर टिकी है। अच्छी बारिश होने पर गोमती और बनास नदियों में पानी की आवक बढ़ने और प्रमुख बांधों में पानी पहुंचने की उम्मीद है।