शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा- वर्ष 2019 से EWS मुहिम की शुरुआत हुई और पिछले सात सालों से युवा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें प्रदेश और देश के नेताओं के सामने रखते रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अब इस मुद्दे को मजबूती से जयपुर और दिल्ली तक पहुंचाने की जरूरत है। भाटी ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं की है। उनका उद्देश्य केंद्र की भर्तियों में पात्र युवाओं को अवसर दिलाना और उनकी मांग को दिल्ली तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें जिस मुकाम तक पहुंचाया है, उसे वे नहीं भूल सकते। उन्होंने कहा- जो नेता ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करते हैं, उन्होंने EWS की समस्याओं को लेकर कभी चिट्ठी लिखी है या नहीं। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी मांगों के समर्थन में नेताओं से जवाब मांगना चाहिए। भाटी ने एक कवि की लाइनों का जिक्र करते हुए कहा कि जब सड़कें सुनसान हो जाती है तो सदन आवारा हो जाते हैं। ऐसे में अब सही मायने में सिर गिनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जनता के आशीर्वाद से यहां पहुंचा हूं। 2024 में चुनाव लड़े तो कई एजेंसियां देख लीं, अब भी एजेंसियां भेज दो तो उसके लिए भी तैयार बैठा हूं। अब डर नहीं लगता। दरअसल, रविंद्र सिंह भाटी इन दिनों आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आरक्षण में आ रही विसंगतियों को दूर करने और पात्र लोगों को इसका लाभ दिलाने की मांग को सरलीकरण रैली निकाल रहे हैं। यह रविवार को जालोर पहुंची। शहर के सूरज पोल चौराहे पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जेसीबी से पुष्पवर्षा कर भाटी का स्वागत किया। इसके बाद भाटी ने जनसभा को संबोधित किया। भाटी ने EWS से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने बताया कि क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन की ओर से EWS मुहिम को लेकर उनसे संपर्क किया गया था। भाटी ने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर आगे बढ़ने के लिए तैयार हुए, लेकिन इसके लिए जयपुर और दिल्ली में बैठे जिम्मेदार लोगों तक मजबूती से अपनी बात पहुंचाना जरूरी है। पांच एकड़ जमीन की शर्त पर उठाए सवाल
भाटी ने EWS आरक्षण में पांच एकड़ जमीन की शर्त को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के 10 प्रतिशत EWS आरक्षण में पांच एकड़ जमीन से जुड़ी शर्त व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में जमीन की कीमत और स्थिति में अंतर का उदाहरण देते हुए कहा कि गुरुग्राम और जालोर की जमीन की तुलना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जालोर-सिरोही क्षेत्र में जमीन की स्थिति और परिस्थितियां अलग हैं। ऐसे में जमीन से जुड़ी शर्तों के कारण कई पात्र लोग EWS के दायरे से बाहर हो रहे हैं। उन्होंने इन प्रावधानों में व्यावहारिक बदलाव की मांग की। उन्होंने जैन समाज सहित अन्य समुदायों से भी इस मुहिम में आगे आने का आह्वान किया। भाटी ने कहा कि कई जातियां राज्य में OBC श्रेणी में हैं, लेकिन केंद्र में सामान्य वर्ग में आती हैं। ऐसे मामलों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के सामने अलग तरह की समस्याएं खड़ी होती हैं, जिनकी आवाज भी उठाई जानी चाहिए। ‘कई एजेंसियां देख लीं, अब डर नहीं लगता’
सभा के दौरान भाटी ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ अध्यक्ष रहते हुए कई मुकदमों का सामना किया और बाद में उन्हें ‘कृष्ण की जन्मभूमि’ देखने का मौका भी मिला। उन्होंने कहा कि अब डर जैसी कोई बात नहीं है और जनता जाग चुकी है। भाटी ने कहा कि वे जनता के आशीर्वाद से यहां तक पहुंचे हैं और कई एजेंसियों का सामना कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे आगे भी इसके लिए तैयार हैं, लेकिन गरीब, शोषित और वंचित वर्ग के साथ अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा। भाटी ने आगामी पंचायत चुनावों का जिक्र करते हुए लोगों से अपील की कि चुनाव में वोट मांगने आने वाले नेताओं से EWS मुद्दे को लेकर उनके द्वारा किए गए प्रयासों और हस्ताक्षरित पत्रों की स्थिति के बारे में सवाल किया जाए। उन्होंने कहा कि EWS की विसंगतियों को दूर करने के लिए युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को संगठित होकर अपनी मांग मजबूती से सरकार के सामने रखनी होगी।