शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा- समय रहते नहीं सुधरे तो दादागिरी जेब में रखनी पड़ेगी। 50 साल का मटेरियल है और जनता के आशीर्वाद से यहां खड़ा हूं। तीन बार छाती ठोककर निर्दलीय चुनाव लड़कर आया हूं। मैं कभी नहीं चाहूंगा कि प्रशासन से दो-दो हाथ करने पड़ें। कठपुतली बनकर काम करना बंद कर दो…नहीं तो राज तो ढाई साल का रहा है, टाइम पर इलाज हो जाएगा, पता भी नहीं चलेगा। भाटी ने ये बात मंगलवार रात को EWS सरलीकरण यात्रा के दूसरे चरण के दौरान नागौर के पशु मेला मैदान में कही। इस दौरान उन्होंने प्रशासन के रवैये को लेकर जमकर नाराजगी जताई। भाटी ने कहा- प्रशासन के नुमाइंदे कह रहे हैं कि अगर लोगों ने जबरदस्ती की तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। मैं कहता हूं कि तुम्हारी जेलों की कैपेसिटी बढ़ा देना। ये सब साथी इकट्ठे होकर आ गए तो पैर रखने की जगह नहीं मिलेगी। उधर, बुटाटी में सभा के दौरान प्रशासन की ओर से माइक बंद करने पर भाटी गुस्सा हो गए। उन्होंने कहा- माइक बंद करने से आवाज नहीं दबेगी। EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आरक्षण से जुड़े नियमों में सरलीकरण की मांग को लेकर भाटी की यात्रा का दूसरा चरण 5 अक्टूबर से शुरू हुआ था। इसके तहत यात्रा बीकानेर के बाद नागौर पहुंची। भाटी ने कहा कि कई लोगों ने मुझे फोन कर कहा- ‘क्या वे हाथी-घोड़ों पर चढ़ेंगे’। इस पर मैंने कहा कि जब तक मेरे भाई साथ बैठे हैं, तब तक छाती ठोककर बैठेंगे। माइक बंद कर सकते हो, हौसले नहीं तोड़ सकते इसके बाद भाटी की यात्रा बुटाटी पहुंची। भाटी ने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की आवाज दबाने का प्रयास कर रहे हैं। जयपुर में बैठे लोगों को यह बात खटक रही है कि उनके खिलाफ कोई कैसे बोल सकता है और वे हमें रोकने का प्रयास कर रहे हैं। रविंद्र भाटी ने कहा- जनता पूरी तरह एकजुट है और माथा पटकने से कुछ नहीं होगा। इस दौरान समर्थकों ने ‘जब-जब भाटी बोला है, राज सिंहासन डोला है’ के नारे लगाए। भाटी ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि मैं गरीब ब्राह्मण, जैन, विश्नोई और राजपुरोहित युवाओं की बात करने के लिए आया हूं। जरूरी नहीं कि हर घर से मुख्यमंत्री बने, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की पीड़ा सुनना जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा- आप माइक को बंद कर सकते हो, हमारे हौसलों को नहीं तोड़ सकते। पुलिस अफसरों से बोले- विजय स्तंभ और अशोक स्तंभ का मान रखो शिव विधायक ने पुलिस अधिकारियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा- पुलिस के कई अधिकारी बंद एसी कमरों में बैठे हैं और जनसेवा की बात करने के बावजूद अपनी शपथ को भूल रहे हैं। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से कहा कि नौकरी जॉइन करते समय ली गई शपथ को याद करें। किसी और का मान रख सको तो रखो, लेकिन कंधे पर लगे विजय स्तंभ का मान जरूर रखना। उन्होंने कहा कि उनका मान रख सको तो रखना, लेकिन टोपी पर लगे अशोक स्तंभ का मान जरूर रखना। आज जो लोग किसी की "बटरिंग" कर रहे हैं, हो सकता है कि वे ढाई साल बाद सत्ता में रहें या नहीं रहें, लेकिन वे 50 साल तक यहीं रहने वाले हैं। उन्होंने नागौर के कार्यवाहक एसपी आसाराम चौधरी का जिक्र करते हुए कहा कि कठपुतली मत बनो। पुलिस की नौकरी अधिकारियों को उनकी मेहनत से मिली है और यह जनता की सेवा के लिए मिली है। मुकदमों के डर से दबने वाला नहीं भाटी ने कहा कि कई लोगों ने मुझे रात में कार्यक्रम करने पर गिरफ्तारी और मुकदमे दर्ज होने की बात कही थी। मेरे लिए ये मुकदमे मेडल हैं और मैं मुकदमों के डर से दबने वाला नहीं हूं। भाटी ने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि मुकदमों और जेलों के डर से मुझे दबाने की कोशिश नहीं करें। 2019 से आज तक छाती ठोककर लड़ते आया हूं। पिछले राज में भी मुझ पर कई मुकदमे लगे। कई बार जेल गया। अगर इन भाइयों के लिए जेल जाना पड़ा तो उसके लिए भी तैयार हूं। क्या है EWS आरक्षण… केंद्र सरकार ने 103वें संविधान संशोधन अधिनियम के जरिए 14 जनवरी 2019 को EWS आरक्षण की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10% आरक्षण देना था। इस आरक्षण के दायरे में वो परिवार थे- जिनकी कुल सालाना आय 8 लाख रुपए से कम, 5 एकड़ से कम कृषि भूमि, 1000 वर्ग फीट से कम का आवासीय मकान या अधिसूचित नगरपालिकाओं में 100 गज से कम का प्लॉट हो। फरवरी 2019 में इस आरक्षण को राज्य में भी लागू कर दिया था। लेकिन कठिन शर्तों के चलते सर्टिफिकेट बनवाने में इस वर्ग से जुड़े युवाओं को कई दिक्कतें आ रही थीं। ऐसे में तत्कालीन राज्य सरकार ने 20 अक्टूबर को भूमि और भवन संबंधी सभी शर्तें हटाते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। EWS प्रमाण पत्र के लिए केवल 8 लाख की वार्षिक आय सीमा को ही आधार मानने का ऐलान कर दिया था। माइक बंद करवाने और समर्थकों को डराने का आरोप अपने भाषण के दौरान भाटी ने आरोप लगाया कि सरलीकरण यात्रा के दौरान आचार संहिता का हवाला देते हुए उनके साथ शामिल होने वाले लोगों की गाड़ियां रुकवाई गईं। डीजे बंद करवाए और समर्थकों डराया गया। वे भाषण के दौरान माइक बंद करवाने की वजह से पुलिस व प्रशासन पर भड़के थे। इसी मामले को लेकर उन्होंने SP आसाराम चौधरी का जिक्र किया। रविंद्र भाटी की आपत्तियां और मांग क्या हैं… … यह खबर भी पढ़ें… EWS आरक्षण को लेकर रविंद्र भाटी सड़कों पर क्यों उतरे?:‘सरलीकरण’ यात्रा का आखिर क्या मकसद और आगे क्या है बड़ा प्लान