पीएम मोदी ने रविवार को ओडिशा के खुर्दा जिले में बने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के दूसरे डेटा सेंटर का इनॉगरेशन किया। भुवनेश्वर के पास इन्फो वैली-II में 18.55 एकड़ में बना यह परिसर नवी मुंबई के RBI के मुख्य डेटा सेंटर के डिजास्टर रिकवरी बैकअप के रूप में काम करेगा। अगर किसी प्राकृतिक आपदा, तबाही, हमले में मुंबई वाला डेटा सेंटर प्रभावित होता है तो ओडिशा सेंटर से बैकअप जारी रहेगा। जिससे देश के पूरे बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम (यूपीआई, आरटीजीएस, एनईएफटी) में रुकावट नहीं आएगी। नए डेटा सेंटर क्या है, इसकी जरूरत क्यों पड़ी; 4 सवाल-जवाब सवाल: RBI का नया डेटा सेंटर आखिर है क्या? जवाब: इसे एक बेहद सुरक्षित डिजिटल तिजोरी समझिए। जैसे बैंक में पैसे और कीमती चीजें सुरक्षित रखी जाती हैं, वैसे ही डेटा सेंटर में कंप्यूटर सर्वर और स्टोरेज सिस्टम के जरिए महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी और बैंकिंग सिस्टम चलाए जाते हैं। इसमें RBI की इन सेवाओं से जुड़े कंप्यूटर सिस्टम काम करेंगे:
- डिजिटल भुगतान और पैसों के लेन-देन की व्यवस्था।
- बैंकों के बीच भुगतान का हिसाब-किताब और निपटान।
- करेंसी मैनेजमेंट से जुड़े सिस्टम।
- RBI के महत्वपूर्ण नियामकीय कामकाज का डेटा। सवाल: यह डेटा सेंटर किससे बना है, खासियत क्या है जवाब: भारी सर्वर और बड़े सुपरकंप्यूटर का वजन सहने के लिए इमारत का फर्श मजबूत रीइन्फोर्स कंक्रीट से बना है। सुरक्षा के लिए बम-प्रूफ दीवारें, एडवांस्ड फायर डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम (जो बिना पानी के गैस से आग बुझाता है ताकि कंप्यूटर खराब न हों) लगाया गया है। सेंटर को दुनिया के सबसे ऊंचे मानकों (टियर-IV) पर बनाया गया है। बिजली, इंटरनेट और कूलिंग का बैकअप 2एन+1 फॉर्मेट में है। यानी हर जरूरी चीज के दो बैकअप हमेशा तैयार रहेंगे। सर्वर को लगातार चालू रखने के लिए बिजली आपूर्ति, जनरेटर, कूलिंग और कनेक्टिविटी की अतिरिक्त व्यवस्था रखी गई है। मुंबई-चेन्नई जैसे महानगरों के मुकाबले ओडिशा में इंटरनेट और डेटा ट्रैफिक का दबाव कम है। सवाल: मुंबई के डेटा सेंटर के बैकअप की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब: RBI का मुख्य डेटा सेंटर नवी मुंबई के खारघर में है। ओडिशा का केंद्र इसका दूसरा, यानी बैकअप डेटा सेंटर होगा। मान लीजिए मुंबई में किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा, तकनीकी खराबी या दूसरी गंभीर समस्या के कारण मुख्य सिस्टम प्रभावित हो जाता है। ऐसी स्थिति में ओडिशा का केंद्र महत्वपूर्ण सेवाओं को जारी रखने में मदद कर सकता है। इससे डिजिटल भुगतान और बैंकिंग व्यवस्था के लंबे समय तक ठप होने का जोखिम घटेगा। सवाल: डेटा सेंटर के लिए ओडिशा ही क्यों चुना गया जवाब: इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास 22 मार्च, 2023 को तत्कालीन RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने किया था। भूकंप का अपेक्षाकृत कम जोखिम: इसे ज्यादा भूकंपीय जोखिम वाले इलाकों से दूर चुना गया। सीमा से दूरी: देश की संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से दूर होने के कारण कुछ सुरक्षा जोखिम कम होते हैं। अलग स्थान पर बैकअप: मुख्य केंद्र से भौगोलिक दूरी होने से एक ही जगह की आपदा का दोनों केंद्रों पर असर पड़ने की आशंका घट सकती है।
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