राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने नागपुर में होने वाले विजयादशमी समारोह में विशेष अतिथि के तौर पर पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को बुलाया है। इस खबर के सामने आते ही कांग्रेस ने मोदी सरकार पर तंज कसा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि धनखड़ को RSS का न्योता मिल गया, लेकिन सरकार ने उन्हें अब तक सरकारी आवास नहीं दिया है। यह आवास उन्हें जुलाई 2025 में अचानक इस्तीफा देने के बाद मिलना चाहिए था। रमेश ने कहा कि RSS का न्योता मिलने के बावजूद सरकार का यह रवैया दिखाता है कि “इकोसिस्टम आपस में ही लड़ रहा है और बिखर रहा है।” RSS का विजयादशमी समारोह 20 अक्टूबर को नागपुर के रेशिमबाग मैदान में होगा। यह कार्यक्रम संगठन के स्थापना दिवस पर हर साल आयोजित किया जाता है और इस बार RSS के शताब्दी वर्ष का समापन भी होगा। इस साल नागपुर के रेशिमबाग मैदान में होने वाला कार्यक्रम RSS के शताब्दी वर्ष के समापन का भी प्रतीक होगा। RSS प्रमुख मोहन भागवत समारोह को संबोधित करेंगे। जयराम रमेश का सरकार पर आरोप जयराम रमेश ने एक पोस्ट में कहा, “21 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने कुछ ही मिनटों में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा अचानक स्वीकार कराया। उन्हें तीन साल पहले ही इस पद पर निर्वाचित कराया गया था।” उन्होंने आरोप लगाया कि धनखड़ मोदी सरकार की किसानों की मांगों की लगातार अनदेखी के बड़े आलोचक थे। रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री इतने छोटे मन के हैं कि धनखड़ को अब तक वह आवास नहीं दिया गया, जिसके वे हकदार हैं। धनखड़ ने खराब सेहत का हवाला देकर दिया था इस्तीफा धनखड़ ने भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति पद से अचानक इस्तीफा दिया था। उन्होंने इसके पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारण बताए थे। राष्ट्रपति को भेजे इस्तीफे में धनखड़ ने कहा था, “स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और डॉक्टरों की सलाह मानने के लिए मैं संविधान के अनुच्छेद 67(a) के तहत भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहा हूं।” ------------- यह खबर भी पढ़ें… भागवत बोले- धर्म संकट में आया तो देश खामियाजा भुगतेगा:धर्म और राष्ट्र अलग-अलग नहीं, दोनों एक-दूसरे पर निर्भर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत में धर्म और राष्ट्र अलग नहीं हैं। राष्ट्र का उद्देश्य धर्म है और धर्म राष्ट्र को बनाए रखने में मदद करता है। धर्म संकट में आया तो देश खामियाजा भुगतेगा। मोहन भागवत ने कहा, हमारा राष्ट्र और धर्म अलग नहीं हैं। राष्ट्र का उद्देश्य धर्म है और धर्म राष्ट्र को बनाए रखता है। दोनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं। अगर एक मौजूद है, तो दूसरा भी मौजूद है। अगर एक नहीं है, तो दूसरा भी नहीं है। पढ़ें पूरी खबर….