जयपुर में दूसरा सबसे बड़ा सरकारी हॉस्पिटल राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज (RUHS) में मेडिसिन काउंटर दूर है, जबकि रेस्टोरेंट पास है। ये शायद प्रदेश का पहला सरकारी ऐसा हॉस्पिटल होगा, जहां ओपीडी के मैन ग्राउंड फ्लोर पर नूडल्स, पीजा-बर्गर और अन्य आइटम खाने के लिए रेस्टोरेंट है। वहीं दवाई वितरण करने वाले डीडीसी काउंटर ग्रांउड फ्लोर पर न होकर नीचे बेसमेंट में बनाया गया है। इसके लिए मरीजों को 20 से ज्यादा सीढ़ियां उतरकर जाना पड़ता है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग और गंभीर मरीजों के साथ गर्भवती महिलाओं को होती है। हालांकि यहां 2 लिफ्ट का प्रावधान है, लेकिन धीमी गति से चलने के कारण एक लिफ्ट भी 3 से 4 मिनट बाद आती है। बुजुर्ग मरीज बोलीं- घुटनों-पैरों में दर्द, दो मंजिल चक्कर काटने के बाद दवा लेने आई 64 साल की बुजुर्ग महिला प्रमिला जब दवाई लेने बेसमेंट पहुंची तो उन्होंने इस परेशानी को साझा किया। उन्होंने बताया- मेरे पैरों में दर्द था, जिसे दिखाने मैं हड्डी के डॉक्टर के पास आई थी। डॉक्टर से दवाई लिखवाने के बाद पूछताछ की तो किसी ने दवाई पहली मंजिल पर मिलना बताया। वहां गई तो गार्ड ने दो मंजिल नीचे (बेसमेंट में) वापस जाने के लिए बोला। ग्रांउड फ्लोर पर कैंटीन, लेकिन मेडिसिन काउंटर नहीं हॉस्पिटल में मरीजों को देखने वाले कुछ डॉक्टर्स और स्टाफ ने कहा- ग्राउंड फ्लोर पर दवाई का काउंटर होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा- शायद पहला कोई सरकारी हॉस्पिटल होगा, जहां मेडिसिन काउंटर के लिए जगह नहीं है। वहीं कैंटीन, कैफेटेरिया के लिए जगह उपलब्ध है। मरीजों की पहली प्राथमिकता दवाई और जांच है, जो जहां तक संभव हो सके, ओपीडी फ्लोर पर ही उपलब्ध होना चाहिए। प्रशासन को लेटर लिखा, सुनवाई नहीं मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना, ड्रग स्टोर और डीडीसी की व्यवस्थाएं देख रहे मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज डॉ. मनमोहन गुर्जर ने कहा- ग्रांउड फ्लोर पर डीडीसी नहीं होना बड़ी समस्या है। खासकर बुजुर्ग और गंभीर मरीजों के लिए। उन्होंने बताया- प्रशासन को इसके लिए लेटर भी लिखकर दिया है, लेकिन अब तक कोई व्यवस्था नहीं हुई। वहीं उन्होंने स्टाफ की कमी का भी हवाला देते हुए व्यवस्थाएं शुरू नहीं होने की बात कही।