सलूम्बर शहर में गणपति उत्सव के दौरान इस बार भक्ति, कला और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। विलो के दरवाजा के पास किंग ऑफ विला समूह ने भगवान श्री कृष्ण की झांकी वाली गणपति प्रतिमा तैयार की है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसे बनाने में करीब 35 दिन लगे हैं। इस बार गणपति प्रतिमा को पारंपरिक रूप से अलग द्वापर युग के पांच साल के बालक श्रीकृष्ण के रूप में दिखाया गया है।प्रतिमा में बाल कृष्ण रूपी गणपति को विशाल कालिया नाग के फण पर खड़े होकर लीला करते हुए दर्शाया गया है। गणपति का एक हाथ कालिया नाग पर टिका है,जबकि दूसरे हाथ की मुद्रा लीला करते हुए दिखाई गई है। यह कलात्मक प्रस्तुति श्रद्धालुओं को पौराणिक कथा से जोड़ रही है। आयोजकों ने सिर्फ गणपति की प्रतिमा ही नहीं बनाई,बल्कि इसके आसपास पूरा पौराणिक दृश्य तैयार किया है। इसमें विशाल कालिया नाग,उसके फण, पानी का दृश्य,झरना, पेड़-पौधे और किनारे खड़े बाल स्वरूप शामिल हैं। प्राकृतिक और दोबारा इस्तेमाल होने वाली सामग्री से बनी यह सजावट धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण जागरूकता का संदेश भी देती है। किंग ऑफ विला समूह ने मिलकर किया निर्माण इस अनूठी प्रतिमा का निर्माण जयरथ सिंह पंवार और पिनाक सिंह पंवार के सहयोग में किंग ऑफ विला समूह के सदस्यों ने मिलकर किया।करीब 35 दिनों की मेहनत और रचनात्मक सोच से तैयार इस गणपति स्वरूप में बांस, नारियल के रेशे, पराली और मिट्टी जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है।