सलूम्बर जिले के कादमा गांव में 60 से 65 परिवारों पर बेघर होने का संकट मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि भू-माफिया ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि एक कोलकाता स्थित कंपनी के नाम करवा दी है। ग्रामीणों ने इस बेचान को निरस्त करने और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। भू-माफिया पर जमीन नाम कराने का आरोप झल्लारा तहसील के मालपुर पटवार सर्किल अंतर्गत कादमा गांव के ये परिवार पिछले 100 से 150 वर्षों (तीन-चार पीढ़ियों) से इस भूमि पर खेती कर जीवन यापन कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भू-माफिया ने अधिकारियों की सांठगांठ से यह जमीन चुपचाप अपने नाम करवा ली। इसके बाद इस कंपनी को फर्जी बेचान के जरिए ट्रांसफर कर दिया। गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत और जमापूंजी से इस बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया है। यहां लगभग 65-70 पक्के और कच्चे मकान बने हुए हैं और सिंचाई के लिए 20-25 कुएं भी खोदे गए हैं। बिना फिजिकल वेरिफिकेशन के ही पंजीयन करने का आरोप ग्रामीणों को हाल ही में पता चला कि इस कृषि भूमि का फर्जी बेचान (रजिस्ट्री) 13 जुलाई 2026 को कंपनी के नाम हस्तांतरित कर दिया गया। उनका आरोप है कि पंजीयन अधिकारी/तहसीलदार ने बिना किसी मौका निरीक्षण (फिजिकल वेरिफिकेशन) के ही इस पंजीयन को अंजाम दिया। कंपनी का कोई प्रतिनिधि मौके पर नहीं आया और न ही जमीन पर वर्षों से रह रहे ग्रामीणों से कोई पूछताछ की गई। गांव वालों का कहना है कि जब कंपनी के प्रतिनिधियों से बात की गई तो उन्होंने किसी भी तरह के बेचान से इनकार दिया। इनका ये कहना ग्राम पंचायत कादमा के ग्रामीणों ने ज्ञापन दिया है। ज्ञापन में भूमि पंजीयन और फर्जीवाड़े से जुड़े जो भी तथ्य दिए गए हैं, उनकी जांच के आदेश दिए जा रहे हैं। संबंधित राजस्व अधिकारियों से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी जाएगी। यदि मौका निरीक्षण के बिना या नियमों के विरुद्ध पंजीयन हुआ है, तो नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे। किसी भी पीड़ित किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।" मुहम्मद जुनैद, जिला कलेक्टर, सलूम्बर