सलूंबर की ग्राम पंचायत देवगांव में पिछले 10 सालों के दौरान हुए विकास कार्यों की जांच की मांग उठी है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर मुहम्मद जुनैद को ज्ञापन सौंपकर पंचायत क्षेत्र में हुए निर्माण कार्यों की अभिलेखीय, वित्तीय, तकनीकी और भौतिक जांच कराने की अपील की है। उन्होंने प्रत्येक कार्य का मौके पर सत्यापन कर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई विकास कार्यों में स्वीकृत राशि, वास्तविक खर्च, कार्य की मात्रा और गुणवत्ता से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। माप पुस्तिका, बिल-वाउचर और भुगतान संबंधी जानकारी भी स्पष्ट नहीं है। इसलिए, पंचायत के पिछले एक दशक के सभी प्रमुख विकास कार्यों की रिकॉर्ड के आधार पर जांच और मौके पर भौतिक सत्यापन की मांग की गई है। शिकायत में ग्राम पंचायत क्षेत्र के तालाब, श्मशान घाट, सड़क निर्माण एवं मरम्मत, पुलिया और पेयजल व्यवस्था से जुड़े कार्यों को विशेष रूप से जांच के दायरे में लेने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने इन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, स्वीकृत राशि और उसके वास्तविक उपयोग का तकनीकी सत्यापन करवाने पर जोर दिया है। पुलिया और नालियों का तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग ग्रामीणों ने ये भी कहा- बरसात के दौरान पुलिया और नालियों की स्थिति का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। इससे जलभराव और आवागमन की समस्या का स्थाई समाधान खोजा जा सकेगा। इसके अलावा, ग्रामीणों ने देवगांव सहकारी समिति लेम्प्स में वर्ष 2017 से अब तक हुए कार्यों और खर्च की भी जांच की मांग की है। इसमें किसानों को सरकारी योजनाओं के तहत खाद-बीज की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र किसानों तक पहुंचा है या नहीं, इसकी भी पड़ताल शामिल है। ग्रामीणों ने गांव में गंदे पानी की निकासी की समस्या को भी गंभीरता से उठाया है। शिकायत के अनुसार, नालियों और गंदे पानी की उचित निकासी व्यवस्था न होने के कारण दूषित पानी किसानों के खेतों में पहुंच रहा है। इससे फसलों को नुकसान होने के साथ-साथ किसानों को आर्थिक हानि भी हो रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके पर टीम भेजकर फसल नुकसान का निष्पक्ष सर्वे करवाने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। साथ ही गंदे पानी की समस्या के स्थाई समाधान के लिए पक्की नाली अथवा वैकल्पिक नाले का निर्माण करवाने की मांग भी रखी गई है। मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करवाकर जांच रिपोर्ट तथा कार्रवाई की जानकारी लिखित रूप से उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित पंचायत एवं अन्य संस्थाओं के मूल अभिलेख, बिल-वाउचर, माप पुस्तिकाएं और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि निष्पक्ष जांच से विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई हो सकेगी।