मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलियाजी में इस बार जलझूलनी एकादशी पर तीन दिवसीय मेले में सांस्कृतिक आयोजन भी होंगे। मंदिर परिसर से लेकर मेला ग्राउंड तक तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। तीन दिन तक भगवान सांवलियाजी की शोभायात्रा, जलझूलनी की परंपरा, भजन संध्याएं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, कवि सम्मेलन का आयोजन होगा। इस बार सबसे ज्यादा चर्चा प्रसिद्ध गायक बी प्राक की भजन संध्या और 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' से पहचान बनाने वाले शैलेश लोढ़ा के अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन को लेकर है। इसके अलावा रथ यात्रा में निकलने वाली आकर्षक झांकियां, लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां और रंगारंग आतिशबाजी भी मेले को खास बनाएगी। हर साल की तरह बड़ी संख्या में राजस्थान सहित दूसरे राज्यों से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने सभी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचा दी हैं। पहले दिन अभ्यास शोभायात्रा के साथ होगी शुरुआत, रातभर होंगे कार्यक्रम मंदिर मंडल के अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव ने बताया कि मेले की शुरुआत सोमवार दोपहर 2 बजे अभ्यास शोभायात्रा से होगी। यह यात्रा मंदिर परिसर से रवाना होकर तय मार्गों से गुजरते हुए रात करीब 8 बजे वापस मंदिर पहुंचेगी। शोभायात्रा के मंदिर पहुंचने पर रंगारंग आतिशबाजी होगी। इसके बाद रातभर अलग-अलग मंचों पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर चलेगा। मीरा रंगमंच पर रात 9 बजे नितिन बागवान और कृतिका मालवीय भजन प्रस्तुत करेंगे, जबकि देर रात जय श्री राधे फोक ग्रुप की प्रस्तुति होगी। वहीं गोवर्धन रंगमंच पर नेहा शिल्पी सोनी और सनी अलबेला भजन, कॉमेडी और सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करेंगे। इसके बाद चिराग राजस्थानी डांस ग्रुप अपनी प्रस्तुति देगा। पहले दिन का सबसे बड़ा आकर्षण मंडफिया बाईपास स्थित मंच पर होने वाला अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन रहेगा। इसमें शैलेश लोढ़ा के साथ संजय झाला, भुवन मोहिनी, दीपक पारीक, शंभू शिखर, राम भदावर, मोनिका हटीला, हीरामणि वैष्णव, चेतन चर्चित, लक्ष्मण नेपाली, लकी जारौली, शशिकांत यादव और जॉनी बैरागी सहित कई कवि काव्य पाठ करेंगे। दूसरे दिन निकलेगी भगवान की विशाल रथ यात्रा, स्नान घाट पर होगी जलझूलनी की परंपरा मेले का सबसे जरूरी दिन मंगलवार रहेगा। जलझूलनी एकादशी पर दोपहर 12 बजे भगवान की विशाल रथ यात्रा मुख्य मंदिर से शुरू होगी। रथ यात्रा टेलर मोहल्ला, गड़ी का देवरा और कबूतर खाना मार्ग से होते हुए सांवलिया स्नान घाट पहुंचेगी। यहां भगवान के बाल स्वरूप शालिग्राम को जल में झुलाने की परंपरा निभाई जाएगी। इसके बाद महाआरती होगी और रथ यात्रा वापस मंदिर पहुंचेगी। मंदिर पहुंचने पर भव्य आतिशबाजी के साथ भगवान का स्वागत किया जाएगा। इस पूरे आयोजन के दौरान हजारों श्रद्धालु यात्रा के साथ चलेंगे। हर साल की तरह इस बार भी रथ यात्रा में अलग-अलग धार्मिक झांकियां लोगों का ध्यान खींचेंगी। पंचमुखी बालाजी, शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण की रासलीला, दक्षिण भारतीय शैली की कांतारा झांकी, तिरुपति बालाजी, श्रीनाथजी और गरुड़ पर विराजमान भगवान विष्णु की सजीव झांकियां यात्रा की खास पहचान रहेंगी। इनके साथ पंजाबी भांगड़ा दल, गुजराती लोकनृत्य दल और पंजाबी बैग पाइपर बैंड भी अपनी प्रस्तुति देंगे। बी प्राक की भजन संध्या रहेगी सबसे बड़ा आकर्षण, कई मंचों पर होंगे कार्यक्रम मंगलवार रात का सबसे बड़ा आकर्षण प्रसिद्ध गायक बी प्राक की भजन संध्या होगी। मंडफिया बाईपास स्थित मुख्य मंच पर रात 9 बजे से उनका कार्यक्रम शुरू होगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों के पहुंचने की उम्मीद है। इसके अलावा गोवर्धन रंगमंच पर सवाई भाट अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगे और देर रात मोनिका भदोरिया व उनकी टीम भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेगी। मीरा रंगमंच पर प्रकाश माली अपने दल के साथ भजन संध्या करेंगे, जबकि देर रात आशा वैष्णव की प्रस्तुति होगी। इस तरह मेले में अलग-अलग मंचों पर पूरी रात धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम चलते रहेंगे, जिससे श्रद्धालुओं को एक साथ भक्ति और मनोरंजन दोनों का माहौल मिलेगा। समापन पर छोटू सिंह रावना का कार्यक्रम, सम्मान समारोह आचार संहिता के कारण टला मेले का समापन तीसरे दिन होगा। इस अवसर पर मीरा रंगमंच पर रात 9 बजे प्रसिद्ध भजन गायक छोटू सिंह रावना की भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हर साल मेले के समापन पर मंदिर मंडल की ओर से दिव्यांगों को मोटराइज्ड स्कूटी वितरित की जाती है और मंदिर क्षेत्र के प्रतिभावान स्टूडेंट्स का सम्मान भी किया जाता है। लेकिन इस बार निकाय चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण दोनों कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिए गए हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि आचार संहिता समाप्त होने के बाद अलग से निर्णय लेकर इन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तैयारियां अंतिम चरण में, व्यवस्थाओं पर लगातार नजर मेले में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसे देखते हुए मंदिर प्रशासन ने सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मंदिर परिसर, मेला ग्राउंड, मंचों और रथ यात्रा मार्ग पर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। मंदिर मंडल के सदस्य और प्रशासनिक अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं ताकि मेले के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। आयोजन स्थल, मंच, रोशनी, सजावट और अन्य जरूरी इंतजामों की लगातार समीक्षा की जा रही है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस बार भी जलझूलनी एकादशी का मेला धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भव्य आयोजनों के कारण मेवाड़ के सबसे बड़े मेलों में से एक रहेगा और बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं उपलब्ध रहेंगी।