सवाई माधोपुर नगर परिषद में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। भाजपा उम्मीदवार मेवा चौधरी की सम्पत्ति एक करोड़ से ज्यादा है। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार शैलेंद्र चौधरी की 17 लाख रुपए से ज्यादा है। कांग्रेस के शैलेंद्र दूसरी बार के पार्षद शैलेंद्र चौधरी कांग्रेस से दूसरी बार पार्षद हैं। वह साल 2020 में पहली बार पार्षद बने। इस बार वह वार्ड 6 से 18 वोटों से चुनाव जीते हैं। शैलेन्द्र के पिता रामरतन चौधरी ने 1965 और 1971 में लड़ाई लड़ी थी। शैलेन्द्र को उम्मीदवार बनाने के पीछे सबसे अहम भागीदारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वार्ड पार्षद 18 विनोद जैन की रही। शैलेन्द्र को कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक दानिश अबरार खेमे का होने का भी फायदा मिला। शैलेन्द्र का मिलनसार व्यक्तित्व और कांग्रेस में सक्रियता के चलते उन्हें सभापति पद का उम्मीदवार बनाया गया। रायशुमारी से मेवा बनी दावेदार पहली बार वार्ड 56 से 377 वोटों से जीतकर पार्षद बनी मेवा चौधरी एक गृहिणी है। उनके पति रामहरि चौधरी 25 सालों से कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा के करीबी कार्यकर्ता हैं। वह कृषि मंत्री डॉ मीणा राजनैतिक उतार चढ़ाव के साथी रहे। इस विधानसभा चुनाव में कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा को चुनाव जिताने में रामहरि ने अहम भागीदारी निभाई थी। जिसके चलते सभापति की सीट ओबीसी आने पर उन्हें प्रबल दावेदार माना जा रहा था। चुनाव जीतने के साथ भाजपा की ओर से सभी पार्षदों की बाड़ेबंदी की थी। बाड़ेबंदी के दौरान कृषि मंत्री की ओर से भाजपा के जीते सभी 33 पार्षदों से रायशुमारी की गई। जिसमें मेवा चौधरी का नाम प्रमुखता से सामने आया था। जिसके बाद उन्हें बाड़ेबंदी से सवाई माधोपुर लाया गया और सभापति का नामांकन करवाया गया। मेवा को नामांकन करवाने के साथ ही भाजपा ने महिलाओं वोटरों को भी साधने का प्रयास किया है।