सवाई माधोपुर के सूरवाल बांध के डूब क्षेत्र में खेतों में पानी भरने और रबी की बुवाई प्रभावित होने की आशंका के चलते किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि बांध में 11 फीट की निर्धारित सीमा के बजाय 16 फीट तक पानी रोका जा रहा है। उन्होंने 20 अक्टूबर 2026 से पहले नहर खोलने, प्रभावित खेतों का सर्वे कराकर मुआवजा देने और जलभराव की सीमा तय रखने की मांग की। किसानों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी कि 20 अक्टूबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। 16 फीट तक पानी भरने से खेत प्रभावित होने का आरोप ग्रामीणों के अनुसार, सूरवाल बांध का पूर्व निर्धारित जलभराव स्तर 11 फीट है, जबकि वर्तमान में 16 फीट तक पानी भरने की व्यवस्था से आसपास के खेत प्रभावित हो रहे हैं। कई जगह जलभराव के कारण कृषि कार्य करना मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि समय पर नहर नहीं खुलने से खेतों में पानी भरा रहता है। इससे रबी की फसल की बुवाई में देरी होने की आशंका है और उनकी आजीविका पर भी असर पड़ सकता है। ज्ञापन में आटूण खुर्द, आटूण कलां, रामड़ी, घुड़ासी, मधुरापुर, गोटड़ा, खिदरपुर और अडूण्डी सहित आसपास के गांवों के किसानों की समस्याओं का उल्लेख किया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर राहत दिलाने की मांग की। ज्ञापन में रखीं पांच प्रमुख मांगें किसानों ने सूरवाल बांध में जलभराव की सीमा पूर्व निर्धारित 11 फीट रखने और इससे अधिक पानी रोके जाने की स्थिति की जांच कराने की मांग की। इसके अलावा जलभराव से प्रभावित कृषि भूमि का सर्वे करवाकर नियमानुसार राहत और मुआवजा दिलाने की मांग भी की। ग्रामीणों ने 20 अक्टूबर 2026 से पहले नहर खोलने और किसानों की जरूरत के अनुसार पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने की मांग रखी। साथ ही बांध और नहर के जलस्तर व संचालन की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने का आग्रह किया। मांगें नहीं मानीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते जलभराव की समस्या का समाधान होने से कृषि भूमि को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है और किसान रबी की फसल की बुवाई समय पर कर सकेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 20 अक्टूबर तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो वे आगे उग्र आंदोलन करेंगे।