अल्पसंख्यक स्टूडेंट्स की पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप गबन मामले के तार पश्चिम बंगाल तक जुड़े थे। अजमेर पुलिस इस फर्जीवाड़े में शामिल एक आरोपी को वहां से पकड़कर लेकर आई है। आरोपी अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते आरोपियों को उपलब्ध करवाता था। इसके बाद स्कॉलरशिप की राशि हड़पने के लिए फर्जी आवेदन और बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के मुख्य सरगना तक पहुंचने में जुटी है। शिक्षा विभाग की शिकायत के बाद क्लॉक टावर थाना पुलिस ने जांच शुरू की थी, जिसमें करीब 5.60 लाख रुपए की स्कॉलरशिप राशि के गबन का पता चला है। बैंक अकाउंट देने के बदले मिलता था कमीशन एडिशनल एसपी सिटी हिमांशु जांगिड़ ने बताया कि पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर से आरोपी मोहम्मद अलाउद्दीन (63) को गिरफ्तार किया है। आरोपी अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते आरोपियों को उपलब्ध करवाता था। इन खातों में छात्रवृत्ति की रकम आने के बाद राशि का इस्तेमाल किया जाता था। इसके बदले आरोपी को कमीशन दिया जाता था।जांच में अब तक 27 संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की गई है। इनमें से आरोपी के खाते में जमा 37 हजार रुपए पुलिस ने फ्रीज करवा दिए हैं। पश्चिम बंगाल तक पहुंची पुलिस एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला के निर्देश पर एएसपी सिटी हिमांशु जांगिड़ और सीओ दक्षिण मनीष बड़गुजर के सुपरविजन में क्लॉक टावर थानाधिकारी भीखाराम काला के नेतृत्व में टीम बनाई गई। टीम ने PSP पोर्टल से जुड़े रिकॉर्ड, बैंक खातों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला। जांच के बाद पुलिस टीम पश्चिम बंगाल और बिहार पहुंची और दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस का मानना है कि आरोपी इस नेटवर्क की पूरी कड़ी का सिर्फ एक हिस्सा है। जांच में मुख्य सरगना की पहचान होने की भी बात सामने आई है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। करीब 5.60 लाख रुपए का फर्जीवाड़ा सामने आया था मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) दर्शना शर्मा की शिकायत पर क्लॉक टावर थाने में मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में बताया था कि अल्पसंख्यक विभाग की पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना में PSP पोर्टल का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आवेदन किए गए और छात्रवृत्ति की राशि अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवाई गई। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की, जिसमें बैंक खातों और पोर्टल से जुड़े रिकॉर्ड खंगालने पर करीब 5.60 लाख रुपए के फर्जीवाड़े की परतें सामने आईं।