परिजन की जिंदगी बचाने की चिंता में हनुमानजी से लगाई गई आस धीरे-धीरे साधना बन गई। फिर यही साधना शब्दों में उतरने लगी। लगातार 42 महीने तक सूर्योदय से सूर्यास्त तक लेखन चला, जो मंगलवार को 1,435 पन्नों के ‘रामार्पण हनुमन्त ग्रंथ कथा’ के रूप में पूरा हुआ। ग्रंथकार श्याम सुंदर ‘श्यामा’ के अनुसार हनुमानजी पर केंद्रित इस ग्रंथ में हनुमान चालीसा की 40 चौपाइयों और 3 दोहों की विस्तृत आध्यात्मिक व्याख्या की गई है। इस ग्रंथ को सबसे पहले अयोध्या में भगवान राम के दरबार में अर्पित किया जाएगा। श्याम सुंदर बताते हैं कि इस ग्रंथ की शुरुआत उस दौर में हुई, जब परिवार का एक सदस्य गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। ग्रन्थ में हनुमान चालीसा के साथ रावण के ‘पंक्तिभेद’ अपराध, 11वें रुद्रावतार, चंडी महायज्ञ, गोवर्धन पर्वत और श्रीराम-हनुमान के संवाद के प्रसंगों का भी विस्तार दिया गया है। महिलाओं के हनुमान चालीसा पाठ के अधिकार और श्रीरामरहस्योपनिषद से जुड़े संदर्भ भी शामिल किए गए हैं। डॉक्टर बेटे ने आस्था से जोड़ा विज्ञान