सीकर में पंचायती राज संस्थाओं की लॉटरी निकलने के बाद से राजनीतिक समीकरण बनने-बिगड़ने शुरू हो गए हैं। गांवों की पंचायती में भाजपा और कांग्रेस के साथ-साथ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का खासा प्रभाव है। वहीं, इस बार राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी भी प्रत्याशी उतारेगी। पंचायतीराज के सबसे बड़े पद जिला प्रमुख को लेकर अटकलें लगनी शुरू हो गई है। सीकर में जिला प्रमुख का पद ओबीसी महिला कैटेगरी के लिए रिजर्व है। ऐसे में जिला प्रमुख पद के लिए राजनीति में सक्रिय महिलाओं की चर्चा शुरू हो गई है। इधर, पंचायत समिति सदस्यों, जिला परिषद सदस्यों और प्रधान की रिजर्वेशन लॉटरी होने के साथ ही गांवों में पोस्टर लॉन्चिंग शुरू हो गई हैं। गांवों की चौपालों पर चुनावी चर्चा का माहौल गर्म है। बीजेपी में जिला प्रमुख के लिए इंद्रा चौधरी के नाम की चर्चा जिला प्रमुख के पद के लिए भाजपा में बात करें तो प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रा चौधरी गठाला का नाम चर्चा में है। इंद्रा चौधरी गठाला अभी जिला परिषद सदस्य भी हैं और वरिष्ठ पदाधिकारी हैं। इंद्रा चौधरी को जिला भाजपा का प्रमुख वक्ता माना जाता है। इंद्रा चौधरी ग्रामीण इलाके से हैं और संगठन पर अच्छी पकड़ रखती हैं। कांग्रेस में सुनीता गठाला नाम सामने आ रहा कांग्रेस में सबसे पहला नाम जिलाध्यक्ष सुनीता गठाला का है। सुनीता गठाला लगातार दूसरी बार जिलाध्यक्ष बनी हैं। सुनीता गठाला अभी सीकर रहती हैं, लेकिन जिला प्रमुख का पद ओबीसी महिला होने के नाते वे पार्टी का चेहरा हो सकती हैं। सुनीता गठाला को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा का काफी भरोसेमंद माना जाता है। सास-बहू हो सकती आमने-सामने रोचक बात ये है कि इंद्रा गठाला और सुनीता गठाला की ससुराल बिडोली गांव में है। भाजपा की इंद्र चौधरी गठाला, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनीता गठाला की चाची सास लगती हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों ने जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ा तो जिला प्रमुख के पद दोनों आमने-सामने हो सकती हैं। हालांकि अभी तक दोनों ने ही ऐसी कोई मंशा जाहिर नहीं की है, लेकिन दोनों पार्टियों में सबसे ऊपर इन्हीं का नाम है। इन नामों पर भी चर्चा इसके अलावा वार्ड 29 से जिला परिषद सदस्य उर्मिला धायल का नाम भी चर्चा में है। उर्मिला धायल लगातार 4 बार जिला परिषद सदस्य रह चुकी हैं। अन्य नामों में भाजपा से प्रियंका बाजिया का नाम भी चर्चा में है। प्रियंका अभी जिला परिषद सदस्य हैं और फिर से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। प्रियंका बाजिया पहले ABVP से जुड़ी रही हैं।