सिरोही जिला परिषद में ग्राम विकास अधिकारी (VDO) के तबादले और अतिरिक्त कार्यभार सौंपने की प्रक्रिया पर कई सवाल उठ रहे हैं। इन फैसलों की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक सिरोही जिला परिषद ने ग्राम पंचायत सिंदरत में काम करने वाले ग्राम विकास अधिकारी नाथूलाल मीणा को निलंबित किया था। उन पर गंभीर गड़बड़ियों की शिकायतें थीं। यह फैसला जिला स्थापना समिति की 17 दिसंबर 2025 की बैठक में लिया गया था। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय पंचायत समिति शिवगंज तय किया गया था। VDO को कोर्ट से मिली थी राहत इसके बाद नाथूलाल मीणा ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से उन्हें राहत (स्टे) मिल गया। फिर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, जयपुर ने निलंबित ग्राम विकास अधिकारियों को बहाल करने के निर्देश दिए। जांच जारी रहने के कारण उनका मुख्यालय पंचायत समिति शिवगंज ही रखा गया। नाथूलाल मीणा भी इनमें शामिल थे। काम संभालने के अगले ही दिन हुआ ट्रांसफर बाद में विभाग ने नाथूलाल मीणा को आबूरोड पंचायत समिति की ग्राम पंचायत सांतपुर में तैनात किया। उन्होंने 9 जुलाई 2026 को वहां काम संभाला। हालांकि, काम संभालने के अगले ही दिन 10 जुलाई 2026 को सिरोही जिला परिषद ने उन्हें ग्राम पंचायत सांतपुर से सिरोही पंचायत समिति की ग्राम पंचायत फुगनी में ट्रांसफर कर दिया। इतनी जल्दी किए गए इस ट्रांसफर पर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि ऐसी कौन सी प्रशासनिक जरूरत थी कि एक दिन बाद ही जिला स्थापना समिति की बैठक बुलाकर तबादला करना पड़ा। 60KM दूर की पंचायत का दिया अतिरिक्त कार्यभार इतना ही नहीं, फुगनी में तैनाती के साथ ही उन्हें उसी ग्राम पंचायत सिंदरत का अतिरिक्त कार्यभार भी दे दिया गया। यहीं से उन्हें गंभीर शिकायतों के आधार पर पहले निलंबित किया गया था। खास बात यह है कि ग्राम पंचायत फुगनी से सिंदरत की दूरी करीब 60 किलोमीटर है। इस फैसले पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि अगर सिंदरत का अतिरिक्त कार्यभार देना ही था, तो आसपास की ग्राम पंचायतों कृष्णगंज, खांबल और वेलांगरी में काम कर रहे किसी दूसरे ग्राम विकास अधिकारी को यह जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गई। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी है कि जिस ग्राम पंचायत में संबंधित अधिकारी लंबे समय तक कार्यरत रहे और जहां से उन्हें शिकायतों के आधार पर निलंबित किया गया था, उसी ग्राम पंचायत का पुनः अतिरिक्त कार्यभार सौंपना प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।