महिला अधिकारिता विभाग की सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता) भर्ती-2018 का पेपर लीक मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। SOG की जांच में सामने आया कि पेपर एक जगह से लीक नहीं हुआ था, बल्कि जगदीश विश्नोई और तुलछाराम कालेर गैंग के नेटवर्क के जरिए अभ्यर्थियों तक पहुंचा। दोनों गैंग ने लीक पेपर पहले सॉल्व कराया और फिर अपने नजदीकी लोगों समेत अन्य अभ्यर्थियों को पढ़ाया। कई अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान ब्लूटूथ डिवाइस से नकल भी कराई गई। मामले में चूरू निवासी मनीराम सारण की गिरफ्तारी के बाद अब तक 13 आरोपी पकड़े जा चुके हैं। जगदीश गैंग ने जयपुर से लीक किया था पेपर जांच के अनुसार 6 जनवरी 2019 को हुई इस भर्ती परीक्षा का पेपर जगदीश विश्नोई गैंग ने जयपुर से लीक किया था। वहीं, तुलछाराम कालेर गैंग के सरगना तुलछाराम कालेर और गैंग के सदस्य राजू मैट्रिक्स व दिनेश सिंह चौहान ने बीकानेर के एक परीक्षा केंद्र से पेपर लीक किया था। पहले पेपर सॉल्व कराया, फिर अभ्यर्थियों तक पहुंचाया दोनों गैंग ने लीक किए गए पेपर को पहले सॉल्व कराया। इसके बाद गैंग के सदस्यों ने अपने नजदीकी लोगों और दूसरे अभ्यर्थियों तक पेपर पहुंचाया। जांच में यह भी सामने आया कि कई अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल कराई गई।