भाजपा ने 7 नगर निगमों सहित प्रदेशभर के नगर परिषदों व नगर पालिकाओं में ‘ऑपरेशन बोर्ड’ की रणनीति बनाई है। जहां भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला है, वहां पर सभी पार्षदों को एकजुट रहने का आदेश दिया गया है। जबकि अल्पमत या कांटे की टक्कर वाले निकायों में बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस व थर्ड फ्रंट के असंतुष्टों को साधने के लिए भाजपा ने स्थानीय नेताओं की टीम बना कर जिम्मेदारी दी है। भाजपा ने विपक्षी खेमे से जुड़े पार्षदों तक पहुंचने के लिए ‘परिवार व परिचत’ संपर्क की रणनीति बनाई है। इसकी मॉनिटरिंग प्रदेश के नेताओं की टीम कर रही है। भाजपा के प्रदेश कार्यालय में बुधवार को पदाधिकारियों की बैठक में रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। विपक्ष के ‘नाराज’ पार्षद को कमेटियों का ऑफर बताया जा रहा है कि भाजपा ने विपक्षी खेमे से जुड़े पार्षदों तक पहुंचने के लिए ‘परिवार व परिचत’ संपर्क की रणनीति बनाई है। इसके लिए निर्वाचित पार्षदों को संपर्कों को खंगाला जा रहा है। ताकि जहां संख्या भाजपा के पक्ष में पूरी नहीं है, वहां बोर्ड गठन के लिए जरूरी समर्थन जुटाया जा सके। इसके लिए अंदरुनी तौर पर पार्षदों को कमेटियों व पद का ऑफर भी दिया जा रहा है। निर्दलीयों का भाजपा की तरफ झुकाव: कई निकायों में भाजपा या कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से निर्दलीय, बागी और छोटे दलों के पार्षद अचानक सबसे महत्वपूर्ण हो गए हैं। ऐसे में दोनों दलों ने इन पार्षदों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। लेकिन निर्दलीयों व बागियों का भाजपा की तरफ ज्यादा झुकाव है। इसकी वजह केंद्र व राज्य में भाजपा सरकार का होना माना जा रहा है। नगर परिषद व पालिकाओं में विधायक व विधायक प्रत्याशियों की चली: नगर परिषद व नगर पालिकाओं में सभापति के लिए नाम तय करने में अधिकांश जगह विधायक व विधायक प्रत्याशियों की चली है। हालांकि इन्होंने जिलाध्यक्ष व निकाय प्रभारी को संतुष्ट कर नाम प्रदेश कार्यालय भिजवाएं है। जिन की सिफारिश पर सभापति प्रत्याशी तय हुआ है, अब बोर्ड बनाने की जिम्मेदारी भी उसी को दी गी है।