मेयर-सभापति के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही प्रदेश के 10 नगर निगमों में भाजपा-कांग्रेस के मेयर प्रत्याशियों के चेहरे साफ हो गए हैं। भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा अपना मेयर पहले ही निर्विरोध बनवा चुकी है। जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अलवर में भाजपा का बोर्ड बनना तय माना जा रहा है। अजमेर, बीकानेर, पाली में भले ही कांग्रेस बहुमत के आंकड़े के करीब है लेकिन यहां भी भाजपा सेंध लगाने की तैयारी में है। वहीं, जयपुर में मेयर पद के लिए भाजपा ने सुनील कोठारी को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने बहुमत नहीं होने के बावजूद सुनीता मावर को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। रणनीति के तहत कांग्रेस ने सुनीता मेठी और दशरथ अटल से भी नामांकन पत्र भरवाया है। जोधपुर निगम में भाजपा ने प्रसन्नचंद मेहता को मेयर प्रत्याशी घोषित किया है। कांग्रेस ने यहां अशोक गहलोत के करीबी राजेंद्र सोलंकी को प्रत्याशी बनाया है। कोटा में भाजपा ने आखिरी समय में अनुसुईया गोस्वामी को प्रत्याशी घोषित किया। जयपुर से सुनील ही क्यों? परकोटे का समीकरण साधा, वैश्य समाज का चेहरा किशनपोल से जीत: सुनील कोठारी किशनपोल विधानसभा के वार्ड-112 से जीते हैं। यह विस सीट कांग्रेस के पास है। शहर के 6 विधायक नहीं चाहते थे कि उनके क्षेत्र से मेयर बने। वैश्य समाज से तय था नाम: पहले से तय था कि मेयर प्रत्याशी वैश्य समाज से होगा। कोठारी इस कसौटी पर खरे उतरे। वैश्य समाज से राज्यसभा भेजने की मांग भी उठी थी। कांग्रेस का सुनीता मावर पर दांव इसलिए... वरिष्ठता पर भरोसा, मेयर दौड़ में रह चुकीं सबसे वरिष्ठ पार्षदों में: सुनीता मावर कांग्रेस की सबसे वरिष्ठ पार्षदों में से एक हैं। उन्होंने वार्ड-118 से जीत दर्ज की है। सुनीता पहले भी मेयर पद की दौड़ में शामिल रही हैं। दो नाम बैकअप में: पार्टी ने रणनीति के तहत सुनीता मेठी और दशरथ अटल से भी नामांकन कराया है। विधायकों की एकराय के बाद सुनीता मावर को मैदान में उतारा गया। बागी निर्दल माने, अब 198 निकायों में सीधी टक्कर प्रदेश में बड़ी संख्या में निर्दलीय और बागी मान गए हैं। अभी भी 49 जगहों पर निर्दलीय और तीसरे दलों ने पेंच फंसाया हुआ है। अब इस मुकाबले में 198 निकायों में सीधा ‘कमल’ बनाम ‘हाथ’ हो गया है। प्रदेश की 169 नगर पालिकाओं में सीधी भिड़ंत हैं, जहां पर भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी सर्वाधिक जगहों पर आमने सामने हैं। उधर, 24 नगर परिषदों में भी लगभग ये ही हाल है। कुल दो प्रत्याशियों वाले निकायों में 200 से अधिक जगहों पर दो उम्मीदवारों के बीच आर-पार की लड़ाई है। इनमें 172 नगर पालिकाएं, 24 नगर परिषद और 5 नगर निगम शामिल हैं। नगर परिषद... भाजपा को 15, कांग्रेस को 8 में बहुमत : 15 नगर परिषदों में भाजपा और 8 में कांग्रेस के पास बहुमत है। ऐसे में इन परिषदों में सभापति बनाने में दोनों दलों को दिक्कत नहीं दिख रही, बशर्ते दल एक-दूसरे के पार्षदों में सेंध न लगा पाएं। धौलपुर में भाजपा के निर्विरोध सभापति चुने जाने के बाद शेष परिषदों में आधी से अधिक में भाजपा बढ़त में है।