तनोट माता मंदिर से शुरू हुई 13 दिन और 400 किलोमीटर की ओरण पदयात्रा शुक्रवार देर शाम तेमड़ेराय मंदिर में महाआरती के साथ संपन्न हुई। यात्रा के दौरान 7 देवी मंदिरों में दर्शन किए गए। समापन पर हजारों श्रद्धालु जुटे। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी महाआरती में शामिल हुए। पदयात्रियों ने देवी-देवताओं की ओरणों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने और उनके संरक्षण की मांग उठाई। सरकारों की नैतिक जिम्मेदारी है ओरणों का संरक्षण महाआरती में शामिल हुए शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि ओरणों का संरक्षण करना सरकारों की नैतिक जिम्मेदारी है। सरकारों को चाहिए कि वे ओरणों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाएं, ताकि इन पवित्र स्थलों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि यदि सरकारें इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती हैं तो ऐसे आंदोलन आगे भी होते रहेंगे। ओरण संरक्षण के लिए आंदोलन के जरिए जयपुर और दिल्ली में बैठे लोगों को जगाने का काम किया जाएगा। भाटी ने ओरण यात्रियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी इस मुहिम को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। ओरण केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि स्थानीय परंपराओं और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ओरणों को उनके नाम से दर्ज करने की मांग ओरण पदयात्रा से जुड़े सुमेर सिंह सांवता ने कहा कि उनकी मुख्य मांग है कि सरकार ओरण संरक्षण से जुड़े लोगों की बात सुने और देवी-देवताओं की ओरणों को सरकारी रिकॉर्ड में ओरण के नाम से दर्ज करे। उन्होंने कहा कि ओरणों की पहचान और उनके संरक्षण के लिए राजस्व रिकॉर्ड में उचित दर्ज होना जरूरी है। इससे इन पवित्र स्थलों की परंपराओं और उनसे जुड़ी मान्यताओं को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। सांवता ने कहा कि पदयात्रा का उद्देश्य सरकार तक ओरण संरक्षण की मांग पहुंचाना और आमजन को इस मुद्दे के प्रति जागरूक करना है। पदयात्रियों ने 13 दिनों तक पैदल चलकर इस अभियान को आगे बढ़ाया। तेमड़ेराय मंदिर में महाआरती के साथ समापन तनोट माता मंदिर से शुरू हुई यह पदयात्रा विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए शुक्रवार देर शाम तेमड़ेराय मंदिर पहुंची। यहां महाआरती के साथ यात्रा का समापन हुआ। समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने ओरण संरक्षण के प्रति लोगों की आस्था और समर्थन को दर्शाया। पदयात्रा के जरिए उठाई गई मांगों के केंद्र में देवी-देवताओं की ओरणों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाना और उनके संरक्षण को सुनिश्चित करना रहा।