अलवर में रहने वाले संसद के डिप्टी सेक्रेटरी पद से रिटायर्ड व्यक्ति और उनकी पत्नी व बेटे पर धोखाधड़ी करने का आरोप है। मामला जमीन के सौदे से जुड़ा है। जमीन खरीदने वाले राजेंद्र बलाई ने 24 लाख रुपए लेने के बाद भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराने का आरोप लगाया है। कोर्ट के आदेश पर थानागाजी पुलिस ने मूलचंद उनकी पत्नी रत्ना देवी और बेटे राजेश के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं जमीन मालिक ने आरोपों को गलत बताया है। पुलिस की जांच में जमीन के दस्तावेज, सौदे से संबंधित रसीद, बैंक खातों में हुए लेन-देन, अलग-अलग खातों से आई रकम, रजिस्ट्री से संबंधित बातचीत और दोनों पक्षों के दावों की जांच की जाएगी। परिवादी का आरोप- न जमीन नाम की और न रुपए लौटाए परिवादी राजेंद्र बलाई के अनुसार- थानागाजी के मूड़ियावास में संसद के डिप्टी सेक्रेटरी पद से रिटायर्ड मूलचंद रहते है। उनके साथ जमीन का सौदा होने पर आरोपियों को पहले 10 लाख रुपए दिए थे। इसमें कुछ राशि नकद और बाकी राशि UPI के जरिए रत्ना देवी के बैंक खाते में भेजी गई थी। इसके बाद 5 जनवरी 2026 को रत्ना देवी ने 24 लाख रुपए में जमीन का सौदा होने और 14 लाख रुपए बाकी होने की लिखित रसीद दी। इसी दौरान जमीन पर बने कमरे, रसोई और लेट-बाथ सहित कब्जा भी उसे दे दिया गया था। परिवादी का कहना है कि उसने कई बार जमीन का बैनामा कराने के लिए कहा लेकिन उन्होंने बैनामा नहीं किया। इसके बाद 16 अप्रैल को मूलचंद के बेटे राजेश ने फोन कर कहा कि उसकी मां के खाते में बाकी 14 लाख रुपए जमा करवा दो, इसके बाद बैनामा कर दिया जाएगा। परिवादी के अनुसार उसने 17 अप्रैल को अपने परिचित के जरिए रत्ना देवी के खाते में 14 लाख रुपए RTGS से जमा करवा दिए। इस तरह जमीन के लिए पूरी 24 लाख रुपए की रकम दे दी गई। परिवादी का आरोप है कि पूरी रकम मिलने के बाद भी आरोपियों ने बैनामा नहीं कराया। 20 अप्रैल के बाद आरोपियों ने फोन उठाना भी बंद कर दिया और बाद में बैनामा कराने से मना कर दिया। परिवादी का कहना है कि न तो जमीन उसके नाम की गई और न ही 24 लाख रुपए वापस किए गए। जमीन मालिक बोले- पूरे रुपए मिलने के बाद रजिस्ट्री करना तय हुआ था थानागाजी के मूड़ियावास में संसद के डिप्टी सेक्रेटरी पद से रिटायर्ड मूलचंद रहते है। उनका कहना है कि राजेंद्र ने उनके बेटे राजेश से संपर्क किया था और बताया था कि उसके पास जमीन खरीदने वाली पार्टी है। जमीन की उनकी मांग करीब 30 लाख रुपए थी, लेकिन बातचीत के बाद 25 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। उनके अनुसार शुरुआत में यह तय हुआ था कि खरीददार पूरी रकम एक साथ देगा। इसके बाद तुरंत उसके नाम रजिस्ट्री कर दी जाएगी। मूलचंद के अनुसार- सौदा होने के बाद राजेंद्र की ओर से पहले 1 लाख रुपए उनके खाते में जमा कराए गए। इसके बाद अलग-अलग लोगों के खातों से कुल करीब 5 लाख रुपए और उनके खाते में डलवाए गए। मूलचंद का कहना है कि उन्होंने साफ कहा था कि पूरी रकम मिलने के बाद ही रजिस्ट्री कराई जाएगी। मूलचंद ने बताया कि बाद में राजेन्द्र दिल्ली स्थित उनके घर पर ओमप्रकाश गुर्जर नाम के व्यक्ति को लेकर आया। राजेन्द्र ने ओमप्रकाश को अलवर में एडीएम बताया था। उन्हें इस बात पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन उनका उद्देश्य जमीन का सौदा करना था। उनके अनुसार वहां ओमप्रकाश ने 5 लाख रुपए दिए और जल्द रजिस्ट्री कराने की बात कहते हुए 14 लाख रुपए का चेक भी दिया। मूलचंद का कहना है कि कागजों के अनुसार 28 फरवरी तक बाकी रकम देने की बात थी लेकिन उस समय तक भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद 5 मार्च की तारीख दी गई लेकिन उस तारीख पर भी रकम नहीं मिली। इसके बाद भी लगातार भुगतान का आश्वासन दिया जाता रहा और आखिरकार 17 अप्रैल को रकम दी गई। सात अलग-अलग खातों से रकम आने पर मांगे कागज मूलचंद ने बताया कि उनके खाते में रकम एक व्यक्ति के खाते से नहीं, बल्कि करीब सात अलग-अलग लोगों के खातों से आई। उन्होंने खरीददार पक्ष से कहा कि जिन सात लोगों के खातों से रकम भेजी गई है, उन सभी से लिखित में यह लिया जाए कि वे सभी मिलकर एक व्यक्ति के नाम जमीन करवाना चाहते हैं। इसके बाद ही किसी एक व्यक्ति के नाम रजिस्ट्री कराने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी। मूलचंद के अनुसार- इस मांग पर भी खरीदार पक्ष लगातार टालमटोल करता रहा और जरूरी कागज उपलब्ध नहीं कराए गए। उनका कहना है कि भुगतान में देरी के कारण उनकी जमीन लंबे समय तक अटकी रही और इस दौरान जमीन पर दूसरी पार्टी से सौदा करने का मौका भी नहीं मिल सका। मूलचंद ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज मामले में जमीन के सौदे से जुड़े सभी दस्तावेज और अन्य सबूत उनके पास मौजूद हैं। उनका कहना है कि पुलिस जांच के दौरान वह सभी दस्तावेज पेश करेंगे और पूरा मामला जांच में स्पष्ट हो जाएगा।