फिजियोथैरेपी में करियर बनाने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस), जयपुर के संघटक कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही सत्र 2026-27 से बैचलर ऑफ फिजियोथैरेपी (BPT) की 100 और मास्टर ऑफ फिजियोथैरेपी (MPT) की 20 सीटों पर प्रवेश शुरू हो सकेगा। आरयूएचएस प्रशासन के अनुसार सरकारी स्तर पर फिजियोथैरेपी का यह प्रदेश का पहला कॉलेज होगा। हालांकि कॉलेज सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत संचालित होगा और राज्य सरकार इसकी स्थापना अथवा संचालन के लिए अलग से वित्तीय सहायता नहीं देगी। BPT और MPT की फीस का निर्धारण विश्वविद्यालय की बैठक में किया जाएगा। कॉलेज के लिए आरयूएचएस परिसर में एक मंजिला भवन चिह्नित किया गया है। अब सबसे बड़ी जरूरत टीचिंग और नॉन-टीचिंग पदों की स्वीकृति और भर्ती की है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले आवश्यक फैकल्टी और स्टाफ की नियुक्ति भी सुनिश्चित करनी होगी। आरयूएचएस का पांचवां प्रमुख संघटक कॉलेज आरयूएचएस में अब तक कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज, मेडिकल कॉलेज, कॉलेज ऑफ नर्सिंग और कॉलेज ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज संचालित हैं। अब पांचवें संघटक के रूप में कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज को भी प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिल गई है। इन शर्तों के साथ मिली अनुमति डेंटल, मेडिकल, नर्सिंग और फार्मेसी कॉलेज पहले से संचालित सरकार से प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद सत्र 2026-27 में BPT और MPT की 120 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। सरकारी स्तर पर यह प्रदेश का पहला कॉलेज होगा। विश्वविद्यालय में पहले से डेंटल, मेडिकल, नर्सिंग और फार्मेसी के संघटक कॉलेज संचालित हैं। -डॉ. प्रमोद येवले, कुलगुरु, आरयूएचएस