ग्रामीणों से समझाइश करते अधिकारी। धरने का प्रतिनिधित्व कर रहे चंदन सोनी, मनोज खोखरवाल, खेताराम सोलंकी और गजानंद जांगिड़ ने बताया कि तहसीलदार ने आश्वासन दिया है कि सोमवार को एनएचएआई, जिला कलेक्टर , एमडी टोल अधिकारियों सहित संबंधित उच्च अधिकारियों से टोल छूट के संबंध में निर्धारित गाइडलाइन की जानकारी ली जाएगी। गाइडलाइन के तहत जो भी छूट संभव होगी, उसे दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। प्रशासन के आश्वासन के बाद रविवार को धरना समाप्त करने का निर्णय लिया गया। धरना-प्रदर्शन की सूचना पर खुनखुना थानाधिकारी अमित स्वामी पुलिस टीम के साथ मौके पर तैनात रहे। वहीं डीडवाना सीओ उमेश गुप्ता भी बांठड़ी टोल प्लाजा पहुंचे और धरना दे रहे ग्रामीणों व युवाओं से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। इस दौरान अधिकारियों ने टोल कंपनी के प्रतिनिधियों और टोल इंचार्ज से भी ग्रामीणों की मांग को लेकर चर्चा की। बाद में डीडवाना सीओ उमेश गुप्ता, छोटी खाटू तहसीलदार बजरंग लाल मीणा और खुनखुना थानाधिकारी अमित कुमार सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने धरनार्थियों से वार्ता की। अधिकारियों ने ग्रामीणों की मांग को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने और मामले में आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया। शेरानी आबाद. बांठड़ी टोल पर धरने पर बैठे ग्रामीण। भास्कर न्यूज । शेरानी आबाद निम्बी जोधा-पाली नेशनल हाइवे पर बांठड़ी टोल प्लाजा पर रविवार को लोग टोल में छूट की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। जिससे आवागमन बाधित होने के साथ ही प्रशासन को मौके पर जाना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वो पिछले आठ साल से छूट क्षेत्र में होने के बावजूद टोल चुका रहे है। वहीं, स्थानीय कार्मिकों द्वारा दुर्व्यवहार किया जा रहा है। जिस कारण से क्षेत्र के लोगों में रोष है। प्रदर्शनकारियेां ने कहा 7 दिन पहले नितिन गडकरी व दिव्या कुमारी के नाम ज्ञापन दिया था, मगर समाधान नहीं निकला। इस पर छोटी खाटू सहित आसपास के गांवों को टोल मुक्त करने को लेकर युवा मंडल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन किया। दोपहर बारह से शाम को चार बजे तक जारी धरना आश्वासन के बाद समाप्त किया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि टोल के नजदीकी क्षेत्र में स्थित गांवों के लोगों को टोल शुल्क से राहत दी जाए। अब सोमवार को ग्रामीण एसडीएम से मुलाकात कर अपनी मांग रखेंगे और आसपास के गांवों को टोल मुक्त करने की मांग पर समाधान निकालने की अपील करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय लोगों को राहत मिलने तक इस मुद्दे पर समाधान के लिए प्रयास जारी रहेंगे।