प्रतापगढ़ जिले की छोटी सादड़ी में रेंजर प्रताप सिंह चूंडावत को डंपर से कुचलने के बाद वन विभाग ने माफिया के खिलाफ सीधी जंग का ऐलान कर दिया है। विभाग अब वन अपराधियों को आर्थिक रूप से पंगु बनाने की तैयारी में है, जिसके तहत उनकी अवैध कमाई से बनी चल-अचल संपत्तियों को नीलाम किया जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरिजित बनर्जी ने इस संबंध में मुख्य सचिव और प्रतापगढ़ एसपी को पत्र भेजा है। पत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107 के तहत वन अपराध और अवैध गतिविधियों से अर्जित संपत्तियों को सीज कर नीलाम करने की स्पष्ट सिफारिश की गई है। जिस जिले में तस्करों के मकान फ्रीज हुए, वहीं पहला वार प्रतापगढ़ वही जिला है जहां तीन साल पहले अफीम-डोडा तस्करों के मकान, दुकानें और कारोबार सीज कर पुलिस ने नकेल कसी थी। अब इसी तर्ज पर पहली बार वन माफिया की काली कमाई पर प्रहार होगा। सीतामाता अभयारण्य और धरियावद क्षेत्र में लंबे समय से सागवान की अवैध कटाई और बजरी खनन में लिप्त तस्कर पहले भी कई बार वनकर्मियों पर जानलेवा हमले कर चुके हैं। गांवों में निकाला आरोपियों का जुलूस प्रतापगढ़ एसपी विशाल जांगिड़ ने बताया कि रेंजर पर हमले के मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अब उनकी संपत्तियों का ब्योरा खंगाल रही है। जैसे ही यह सिद्ध होगा कि संपत्तियां वन अपराध की कमाई से बनाई गई हैं, नीलामी की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। डीएफओ सुरेश अग्रवाल के अनुसार, अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करने के लिए प्रभावित गांवों में पुलिस के साथ फ्लैग मार्च भी निकाला गया है।