कमजोर बीते मानसून का असर झीलों पर दिखने लगा है। पिछोला और फतहसागर झील खाली हैं। इन्हें गर्मियों से पहले (मार्च में) भरने के लिए आकोदड़ा, अलसीगढ़ और मादड़ी बांधों से लाया जाने वाला पानी सितंबर में ही ला चुके हैं। यानी अब गर्मियों के लिए इंतजाम नहीं है। अभी पिछोला का जलस्तर महज 7.11 फीट है। यह क्षमता से करीब 3 फीट खाली है। दूसरी ओर फतहसागर की क्षमता 13 फीट है और अभी इसमें करीब 7 फीट ही पानी है। जल संसाधन अधिकारियों के अनुसार फरवरी के आखिर तक पिछोला का जलस्तर करीब 3 फीट और फतहसागर का करीब 1 फीट रह जाएगा। ऐसे में दोनों झीलों में आने वाले समय में बोटिंग बंद होना तय है। इसका असर पर्यटन के साथ नगर निगम और यूडीए की आय पर भी पड़ेगा। दोनों को बोटिंग के टेंडर से सालाना 10 से 12 करोड़ मिलते हैं। टूरिस्ट सीजन दस्तक दे चुका, जो नवंबर में दीपावली और दिसंबर में न्यू ईयर के दौरान पीक पर रहेगा। फिलहाल पीक सीजन में पर्यटन उद्योग को बड़े नुकसान की आशंका नहीं है, लेकिन जनवरी और फरवरी में भी हर माह 1 लाख से ज्यादा पर्यटक आते हैं। तब पेयजल के साथ पर्यटन को लेकर संकट बढ़ सकता है। अभी से 72 घंटे में पेयजल सप्लाई, डेड स्टोरेज के साथ करना होगा वैकल्पिक इंतजाम झील-बांधों में इतना पानी पिछोला: 356 एमसीएफटी पानी, 10 माह में 250 एमसीएफटी की जरूरत पिछोला में अभी 356 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएफटी) पानी है। पीएचईडी सालभर में करीब 300 एमसीएफटी पेयजल सप्लाई के लिए लेता है। मानसून आने तक 10 माह के लिए करीब 250 एमसीएफटी की जरूरत होगी। फिर झील में करीब 106 एमसीएफटी पानी ही बचेगा। फरवरी के आखिर तक पिछोला का स्तर 3 फीट ही रह सकता है। तब बोटिंग का क्षेत्र कम हो जाएगा। बिना जोखिम बोटिंग के लिए करीब 5 फीट पानी जरूरी है। पिछोला से रोज 28 एमएलडी पानी पीने के लिए लेते हैं। फतहसागर: 292 एमसीएफटी पानी, फरवरी में 1 फीट तक आने का अनुमान फतहसागर में अभी 292 एमसीएफटी पानी है। पीएचईडी सालभर में यहां से करीब 216 एमसीएफटी पानी लेता है। अगले 10 माह में करीब 170 एमसीएफटी पानी की जरूरत होगी। इसके बाद करीब 122 एमसीएफटी पानी बचेगा और जलस्तर माइनस 5 फीट तक गिरने का अनुमान है। फरवरी में जलस्तर करीब 1 फीट रह जाएगा। फतहसागर का जलस्तर सी लेवल यानी 0 फीट पर पहुंचने पर चट्टानें दिखाई देने लगती हैं। ऐसे में मोती मगरी और नेहरू गार्डन प्वाइंट की बोटिंग बंद होने की आशंका है। व्यावसायिक उपयोग पर अंकुश की जरूरत मार्च तक झीलों में पानी खत्म हो जाएगा। गहलोत सरकार के समय से जयसमंद से शहर में आपूर्ति बढ़ाने के लिए पाइपलाइन डली हुई है। इस लाइन को शुरू करना चाहिए। अभी 20 एमएलडी पानी रोज आ रहा है। नई लाइन डालने से 42 एमएलडी आएगा। टीडी डैम से जयसमंद की लाइन जोड़कर पानी ला सकते हैं। जावर माइंस से भी पानी ला सकते हैं। शहर का एरिया भूमिगत जल के मामले में डार्क जोन में चल रहा है। होटलों में स्विमिंग पूल पर रोक लगनी चाहिए। इसमें काफी पानी व्यर्थ होता है। मैरिज गार्डन में लंबे-चौड़े गार्डन बने हुए हैं। यहां घास के बड़े मैदानों पर भी रोक लगनी चाहिए। प्रो. महेश शर्मा, पूर्व सदस्य, झील संवर्धन समिति गर्मी में डेड स्टोरेज भी काम में लेंग पीएचईडी के एसई रवींद्र चौधरी के मुताबिक पिछोला और फतहसागर में मौजूद पानी से अगली गर्मियों तक पेयजल आपूर्ति सुचारू रहेगी। इसके लिए 72 घंटे में सप्लाई कर रहे हैं। गर्मियों में डेड स्टोरेज भी काम लेंगे। पिछोला में 180 व फतहसागर में 165 एमसीएफटी डेड स्टोरेज में रहता है। बड़ी तालाब से 7 व कानपुर-खरबड़िया में ट्यूबवेल से 8 एमएलडी की सप्लाई करेंगे।