मानसून सीजन बीत गया है। हालांकि, राजस्थान से मानसून की विदाई 17 सितंबर से शुरू हो गई थी। बारिश के लिहाज से इस बार मानसून काफी कमजोर रहा और औसत से 17.40 फीसदी कम बारिश हुई। मानसून में औसत बारिश का आंकड़ा 424.71 मिमी है, जबकि इस बार केवल 350.80 मिमी बारिश हुई है। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 329.30 मिमी कम है। पिछले जून से सितंबर तक 680.13 मिमी पानी बरसा था। दूसरी ओर, पश्चिमी राजस्थान में ‘सूखे की आहट’ सुनाई देने लगी है। 14 जिलों में कम बारिश हुई है। इसमें से अधिकांश पश्चिमी राजस्थान के हैं। यहां बारिश कम होने से फसलें सूख गई हैं। पेयजल और पशुओं के चारे-पानी का संकट है। मुख्यमंत्री भजनलाल ने कम वर्षा वाले क्षेत्रों में आकस्मिक कार्यों के लिए जिला कलेक्टरों को एक करोड़ की राशि दी है। साथ ही बाड़मेर, बालोतरा व जैसलमेर सहित अन्य क्षेत्रों में चारा डिपो खोलने के निर्देश दिए हैं। राजस्थान के बांधों की स्थिति अल नीनो का असर कम हो सकता है आईसीआईसीआई बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ओशन डाइपोल (आईओडी) सूचकांक 0.76 के साथ पॉजिटिव जोन में पहुंच गया है। इससे आने वाले दिनों में अल नीनो के प्रतिकूल असर की कुछ भरपाई हो सकती है। अल नीनो अभी भी मानसून के लिए जोखिम है।