भास्कर न्यूज | पिंडवाड़ा पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व पर पिंडवाड़ा में जप, तप, स्वाध्याय, धार्मिक आराधना का भक्तिमय माहौल रहा। आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर की निश्रा में साधु-साध्वी भगवंतों के सान्निध्य में धार्मिक अनुष्ठान हुए। श्री जैन संघ के सचिव मनीष जैन ने बताया कि महापर्व के दौरान गुरुदेव ने प्रवचनों में क्षमापना को जीवन का उत्तम गुण बताया। कहा, किसी से भूल हो जाए तो संवत्सरी प्रतिक्रमण से पहले ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’ कहकर क्षमायाचना करनी चाहिए। इससे मन में द्वेष नहीं रहता। गुरुदेव ने संसार के क्षणिक, पौद्गलिक पदार्थों के प्रति राग से बचने का संदेश दिया। संयम अपनाने की बात कही। हर जीव के प्रति हृदय में संवेदना रखने को कहा। महापर्व के दौरान गुरुदेव के श्रीमुख से श्री कल्पसूत्रजी का वाचन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लाभ लिया। पर्व के अंतिम दिन परमात्मा और तपस्वियों की भव्य रथयात्रा निकाली गई। चांदी के रथ में परमात्मा की प्रतिमा विराजमान की गई। युवाओं ने भक्ति के साथ रथ खींचा। रथयात्रा जैन मंदिर से शुरू हुई। नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए फिर जैन मंदिर पहुंची। आयोजन में मुंबई, सूरत, अहमदाबाद सहित अलग-अलग स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। श्रद्धालुओं ने यहां 50 दिवसीय चातुर्मासिक आराधना का लाभ लिया। आचार्यश्री की पावन निश्रा में अगले दो महीनों में भी विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और आराधनाएं होंगी।