भास्कर न्यूज। धौलपुर नगर परिषद के 60 वार्डों में मतदान के बाद अब नजर नतीजों से ज्यादा बोर्ड गठन के समीकरणों पर है। वार्डवार मुकाबलों के स्थानीय आंकलन में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर दिखाई दे रही है। कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी मजबूत स्थिति में हैं। ऐसे में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने पर बोर्ड बनाने की कमान निर्दलीय पार्षदों के हाथ में जा सकती है। बसपा भी 4 से 5 वार्डों में जीत की स्थिति में बताई जा रही है। यदि यह अनुमान परिणाम में बदलता है तो बोर्ड गठन के समीकरण और रोचक हो जाएंगे। हालांकि यह वार्डवार राजनीतिक आंकलन है, अंतिम परिणाम नहीं। नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। बोर्ड बनाने के लिए 31 पार्षदों का बहुमत जरूरी होगा। भाजपा और कांग्रेस के बीच करीब 20 से 25 वार्डों में सीधी टक्कर है। निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने दोनों दलों के लिए चुनौती बढ़ा दी है। कुछ वार्डों में निर्दलीय मजबूत बताए जा रहे हैं। कुछ में उन्होंने दोनों प्रमुख दलों के वोटों में सेंध लगाई है। ऐसे में परिणाम के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कौन बहुमत के करीब पहुंचता है। किसे निर्दलीयों के समर्थन की जरूरत पड़ती है। .बाड़ेबंदी की तैयारी पर भी नजर... मतदान के बाद राजनीतिक दलों में अपने समर्थित प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद की चर्चा है। यदि किसी दल को बहुमत से कम सीटें मिलती हैं तो वह निर्दलीय विजेताओं को साथ रखने की कोशिश कर सकता है। हालांकि किस दल के कितने प्रत्याशी कहां जाएंगे, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। स्थानीय राजनीतिक आंकलन में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला करीबी रहने की चर्चा है। कई वार्ड स्पष्ट रूप से प्रमुख दलों की झोली में जाते हुए दिख रहे हैं। कई वार्डों में प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़, स्थानीय समीकरण, निर्दलीयों की सक्रियता नतीजों को प्रभावित कर सकती है। बसपा के 4-5 वार्डों में जीत की संभावना भी बोर्ड गठन के समीकरणों में महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि भाजपा या कांग्रेस 31 का आंकड़ा पार नहीं कर पाती है तो निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बढ़ जाएगी। दोनों दलों के नेता निर्दलीय विजेताओं से संपर्क कर सकते हैं। हालांकि किस दल को कितने निर्दलीयों का समर्थन मिलेगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। यदि दोनों प्रमुख दलों के बीच सीटों का अंतर कम रहा तो निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से बोर्ड गठन का रास्ता खुल सकता है। ऐसे में चुनाव का असली रोमांच नतीजों के बाद शुरू होगा। .पिछले चुनाव में बराबरी का मुकाबला, निर्दलीय रहे निर्णायक... धौलपुर नगर परिषद के 60 वार्डों में 2020 में कांग्रेस और भाजपा ने 22-22 सीटें जीती थीं। निर्दलीयों के खाते में 15 सीटें आई थीं। बसपा के खाते में 1 सीट आई थी। यानी दोनों प्रमुख दल बहुमत से 9 सीट दूर रहे थे। ऐसे में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीयों का समर्थन जरूरी हुआ था। इस बार भी 31 का आंकड़ा पार करना चुनौती है। पिछले चुनाव के नतीजे बताते हैं कि धौलपुर में मुकाबला केवल दो दलों के बीच नहीं रहा है। निर्दलीयों की भूमिका पहले भी महत्वपूर्ण रही है। इस बार भी उनके हाथ में बोर्ड गठन की चाबी जाने की चर्चा है। हालांकि इस बार किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी, यह परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा।