घाटे में चल रहे नगर निगम में अधिकारियों-कर्मचारियों को वेतन देने और सफाई ठेकेदारों के भुगतान में दिक्कत आ रही है। कई महीने तक भुगतान का इंतजार करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ निगम के सरकारी पेट्रोल का इस्तेमाल निजी वाहनों में किया जा रहा है। 21 मई, 2021 से करीब 10 कर्मचारियों को प्रतिदिन 1 से 3 लीटर तक पेट्रोल देने की व्यवस्था चल रही है। निगम के अनुसार रोज करीब 22 लीटर पेट्रोल दिया जा रहा है। मौजूदा दरों के हिसाब से इसका खर्च करीब 2400 रुपए प्रतिदिन, 77 हजार रुपए महीने और 9.24 लाख रुपए सालाना बैठता है। खास बात यह है कि पेट्रोल के लिए अधिकृत कर्मचारियों में ऐसे कर्मचारी भी हैं, जिनका अधिकांश काम ऑफिस में ही रहता है। आदेश के अनुसार निजी सहायक, समयपालक, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता जैसे पदों पर तैनात कर्मचारी भी शामिल हैं। फील्ड में जाने के लिए निगम के गैराज और अधिकारियों की गाड़ियां उपलब्ध हैं। इसके बावजूद निजी वाहनों के लिए रोज पेट्रोल स्वीकृत किया जा रहा है। पेट्रोल वितरण सूची में नाम-पद की गड़बड़ी; एलडीसी को बताया कनिष्ठ अभियंता पेट्रोल वितरण को लेकर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि पेट्रोल वितरण की सूची में नाम और पद को लेकर भी विसंगतियां हैं। रिया मल्होत्रा का नाम सूची में है, जबकि आदेश में उन्हें रीवा मल्होत्रा लिखा गया है। उन्हें कनिष्ठ अभियंता बताया गया है, जबकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे एलडीसी हैं। इसी तरह पेट्रोल स्वीकृत कर्मचारियों में एक अधिकारी के सेवानिवृत्त होने की बात भी सामने आई है। आदेशों में पेट्रोल लेने वाले निजी वाहनों के नंबर भी दर्ज हैं। 5 साल से चल रही यह व्यवस्था रोज करीब 22 लीटर पेट्रोल के हिसाब से निगम पर करीब 2400 रुपए प्रतिदिन का खर्च है। महीने में यह करीब 77 हजार और सालभर में करीब 9.24 लाख रुपए बैठता है। पांच साल से अधिक समय से चली आ रही इस व्यवस्था में अब सवाल उठ रहा है कि निजी वाहनों में दिए जा रहे पेट्रोल की वास्तविक खपत का सत्यापन कैसे होता है। इन वाहनों की लॉगबुक और फील्ड विजिट का रिकॉर्ड कौन जांचता है और पेट्रोल की मंजूरी किस आधार पर जारी की जा रही है। कर्मचारियों को निजी वाहन के लिए पेट्रोल आवंटित करने का कोई नियम नहीं है। इन कर्मचारियों को उच्च अधिकारियों के आदेश के तहत ही पेट्रोल देने के आदेश जारी किए गए हैं। यह परंपरा आज की नहीं, लंबे समय से चलती आ रही है। -अतुल शर्मा, एसई गैराज, नगर निगम