सोप में गोमती तालाब के किनारे देहलवाल बाबा मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था और लोक विश्वास का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में सालभर श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी यानी तेजादशमी पर यहां तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता है। इसमें आसपास के करीब 20 गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार देहलवाल बाबा मंदिर की स्थापना ग्राम सोप की बसावट के समय से मानी जाती है। मंदिर में पूजा-अर्चना की परंपरा मीणा समाज के पड़िहार वर्ग के डीगा गोत्र के भोपा परिवार से जुड़ी रही है। वर्तमान में सेवानिवृत्त पुलिस हेड कांस्टेबल लक्ष्मीनारायण मीणा पुजारी के रूप में सेवा दे रहे हैं। मंदिर में सुबह-शाम आरती होती है। पूजा-अर्चना होती है। देहलवाल सेवा समिति और ग्रामीणों के सहयोग से पिछले करीब छह वर्षों में मंदिर परिसर में कई विकास कार्य कराए गए हैं। मुख्य मंदिर ऊंचे थड़े पर बना है। यहां दक्षिण मुखी देहलवाल बाबा की संगमरमर की प्रतिमा स्थापित है। परिसर में कोतवाल बाबा की छतरी है। शंकर पंचायत है। बाबा रामदेवजी, मां जगदम्बा, बजरंग बली के देवस्थल भी हैं। मंदिर में करीब 100 वर्षों से अखंड ज्योति जलने की परंपरा भी बताई जाती है। श्रद्धालुओं में मान्यता है कि बाबा के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना से मनोकामना पूरी होती है। तेजादशमी के मेले में आसपास के गांवों से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इस दौरान धार्मिक आयोजन होते हैं। भजन संध्या होती है। भंडारा होता है। सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। वर्ष 2022 में मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा हुई थी। सामूहिक विवाह सम्मेलन हुआ था। देहलवाल बाबा सेवा समिति के अध्यक्ष राकेश धाकड़ ने बताया कि ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर परिसर में बाउंड्रीवाल सहित अन्य विकास कार्य भी चरणबद्ध तरीके से कराए जा रहे हैं। धार्मिक आस्था, लोकपरंपरा और ग्रामीणों की सहभागिता से देहलवाल बाबा मंदिर सोप क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक पहचान बन चुका है।