राजस्थान के नहरी तंत्र में पानी को लेकर सुलगती चिंगारी अब विकराल रूप लेने लगी है। पंचायत चुनाव सिर पर हैं और कोलायत, लूणकरणसर से लेकर जैसलमेर तक किसान अपनी फसलें सूखती देख रहे हैं। इस बीच जैसलमेर को लगातार 8 दिन से पानी न मिलने के कारण खड़ा हुआ संकट अब गहराता जा रहा है। इससे प्रशासनिक गलियारों में भी हड़कंप मचा हुआ है। अब जैसलमेर को पानी पहुंचाने के लिए विभाग रेग्युलेशन में बड़ा बदलाव करेगा। अभी तक जो दो समूह की बारी 17 अक्टूबर को खत्म होनी थी, उसे संशोधित कर अब 19 अक्टूबर तक बढ़ाया जाएगा। यह बढ़ा हुआ समय पूरी तरह जैसलमेर को पानी देने के लिए रहेगा। इसकी अंदरूनी गणित यह है कि 8 अक्टूबर को अनूपगढ़ और 9 अक्टूबर को चारणवाला ब्रांच की बारी खत्म होनी थी। इसके अलावा 3000 क्यूसेक क्षमता वाली नहरें जैसे पूगल, रोजडी के अलावा मुख्य नहर की आरडी 243 से 1254 तक के सभी डायरेक्ट आउटलेट्स व माइनर को अब दो दिन बाद चलाया जाएगा। इनके शिड्यूल में आंशिक परिवर्तन किया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन नहरों की बारी पिटेगी। बल्कि ये नहरें अपने निर्धारित शेड्यूल से दो दिन लेट चलेंगी। सिंचाई के पानी की कमी से अफसरों की नींद उड़ी अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक पंजाब सरकार से पानी मिलने की उम्मीद पर बैठे अधिकारियों की नींद इस बात पर उड़ी हुई है कि यदि सेकंड स्टेज में पानी का यह मुद्दा और अधिक गर्माया, तो हालात संभालना नामुमकिन हो जाएगा। इसी डर के चलते जल संसाधन विभाग हनुमानगढ़ के चीफ इंजीनियर अरुण सिड़ाना, रेग्युलेशन के एडिशनल चीफ इंजीनियर सुनील कटारिया और अधीक्षण अभियंता रेग्युलेशन हनुमानगढ़ बुधवार को पंजाब का दौरा करेंगे। वे पंजाब के अधिकारियों से बातचीत कर चार समूह की बारी के लिए अतिरिक्त पानी मांगेंगे। हालांकि जानकारों का मानना है कि अतिरिक्त पानी मिलना तो दूर अधिकारी सिर्फ अपने पिटे हुए पानी के बदले ही पानी हासिल करने की कोशिश करेंगे, जिसमें उनकी सफलता पर संशय बना हुआ है।