उदयपुर में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सतीश पूनिया ने कहा- पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अब बुजुर्ग हो गए हैं। मेरी सद्भावनाएं उनके साथ हैं, लेकिन कुर्सी जाते ही उन्हें दूसरों में बुराई नजर आने लगी है। पूनिया ने कहा- प्रदेश के अधिकांश स्थानीय निकायों पर अब भारतीय जनता पार्टी का कब्जा हो चुका है। इसी राजनीतिक शिकस्त के कारण कांग्रेस नेताओं के पेट में दर्द हो रहा है। उदयपुर नगर निगम में नए मेयर पारस सिंघवी और डिप्टी मेयर दिनेश भट्ट के पदभार ग्रहण समारोह में गुरुवार को आए सतीश पूनिया ने यह कहा। वहीं इस दौरान उदयपुर निगम कार्यालय में कार्यकर्ताओं की भीड़ के कारण धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। इससे कई वरिष्ठ नेता परेशान होते रहे। कहा- समझ नहीं आता, इतने अप्रसन्न क्यों रहते हैं गहलोत पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बयानबाजी पर पलटवार करते हुए पूनिया ने तंज कसा। उन्होंने कहा- मेरी पूरी सद्भावनाएं गहलोत के साथ है। वे स्वस्थ रहें और प्रसन्न रहें, लेकिन समझ नहीं आता कि वे इन दिनों इतने अप्रसन्न क्यों हैं। पूनिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता केवल कुर्सी के लिए राजनीति करते हैं। जैसे ही उनके हाथ से सत्ता जाती है, उन्हें दूसरी सरकार और दूसरे व्यक्तियों में सिर्फ कमियां और बुराइयां ही नजर आने लगती हैं। उन्होंने नसीहत दी कि दूसरों को ज्ञान बांटने से पहले गहलोत को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। अपनी ही सरकार में अपनों पर केस दर्ज कराने वाले ज्ञान बांट रहे सतीश पूनिया ने गहलोत सरकार के 2018 से 2023 के कार्यकाल को काले अक्षरों में लिखा इतिहास बताया। उन्होंने कहा- उस सरकार में पेपर लीक की पराकाष्ठा थी।भ्रष्टाचार चरम पर था और कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी। पूनिया ने कांग्रेस के आपसी अंतर्विरोधों पर निशाना साधते हुए कहा- इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि गहलोत की सरपरस्ती में उन्हीं की सरकार के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा- दुनिया के इतिहास में गहलोत सरकार एकमात्र ऐसी सरकार थी, जो संकट के समय महीनों तक रिसॉर्ट में बंद रही। जब प्रदेश की जनता संकट में थी, तब कांग्रेस नेता होटलों में अठखेलियां कर रहे थे। उदयपुर में दिखेगा 'ट्रिपल इंजन' सरकार का काम उदयपुर नगर निगम के नवनियुक्त मेयर पारस सिंघवी और डिप्टी मेयर दिनेश भट्ट के पदभार ग्रहण कार्यक्रम में सतीश पूनिया शामिल हुए। उन्होंने दोनों नेताओं को बधाई देते हुए कहा कि राजनीति में कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता है। सिंघवी और भट्ट की जोड़ी मिलकर उदयपुर शहर की खूबसूरती को निखारेगी और सभी सुचारू व्यवस्थाओं का संचालन बेहतरीन तरीके से करेगी। पूनिया ने कहा- यह टीम सही मायने में केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय की 'ट्रिपल इंजन' सरकार की भावना को धरातल पर उतारेगी। उन्होंने कहा- उदयपुर, जोधपुर और जयपुर जैसे बड़े शहरों में भाजपा ने परिस्थितियों का सटीक आकलन कर सबको साथ लेकर फैसले किए हैं। चैंबर में बेकाबू हुए कार्यकर्ता, बड़े नेताओं को करनी पड़ी मशक्कत पदभार ग्रहण समारोह के दौरान निगम परिसर में भारी उत्साह के बीच अव्यवस्था भी देखने को मिली। दोपहर करीब 1 बजे जब सतीश पूनिया निगम कार्यालय पहुंचे, तो उनके स्वागत के लिए कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा। मेयर और डिप्टी मेयर के चैंबर में क्षमता से कहीं अधिक लोग घुस गए, जिससे वहां पैर रखने तक की जगह नहीं बची। इस दौरान कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। स्थिति इतनी अनियंत्रित हो गई कि कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं और पदाधिकारियों को कमरे के भीतर जाने और पूनिया के पास तक पहुंचने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। अनियंत्रित कार्यकर्ताओं के बीच कई बड़े नेता काफी देर तक परेशान होते रहे। पंजाब और जम्मू-कश्मीर की चुनौती स्वीकार पार्टी द्वारा दी गई नई जिम्मेदारियों पर बात करते हुए सतीश पूनिया ने कहा- भाजपा की रीति-नीति में कार्यकर्ता को जो भी भूमिका मिलती है, उसे पूरे परिश्रम और ईमानदारी से निभाना होता है। उन्होंने कहा कि यह सच है कि पंजाब और जम्मू-कश्मीर राजनीतिक और सांगठनिक दृष्टिकोण से बेहद चुनौतीपूर्ण राज्य माने जाते हैं। यह मेरे लिए गर्व की बात है कि पार्टी ने मुझ पर इतना बड़ा भरोसा जताया है। पूनिया ने विश्वास दिलाया कि वे एक सच्चे और समर्पित कार्यकर्ता के नाते इन राज्यों में पार्टी को मजबूत करने और सकारात्मक परिणाम देने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे। कार्यकर्ता के घर शोक जताने पहुंचे