उदयपुर के सरकारी एमबी हॉस्पिटल में चल रहे शाम्भवी डायग्नोस्टिक लैब के खिलाफ बिना लाइसेंस संचालन को लेकर मुकदमा दर्ज हुआ है। इसमें नगर निगम के पूर्व मेयर चन्द्रसिंह कोठारी को परिवादी बनाया गया है। जबकि पूर्व मेयर ने साफ इंकार किया कि मैंने थाने में ऐसी कोई शिकायत नहीं दी है। मेरी बिना जानकारी के मेरे नाम से एफआईआर दर्ज की गई है। मैंने तो करीब दो महीने पहले कलेक्टर को लैब के संबंध में शिकायत की थी। थाने में न तो मैं गया और ना ही मैंने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। कलेक्टर को दी शिकायत के आधार पर मुझे परिवादी कैसे बना दिया? मैं जिला प्रशासन के समक्ष इसका विरोध करूंगा। पूर्व मेयर ने लैब पर कानूनी कार्रवाई के लिए कलेक्टर को दिया था ज्ञापन पूर्व मेयर कोठारी ने बताया- मैंने कलेक्टर को ज्ञापन दिया था। इसमें बताया था कि तत्कालीन कलेक्टर द्वारा गठित कमेटी की जांच में लैब को दोषी माना तो उस पर अभी तक कार्रवाई क्यों नही की गई। इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। लैब के पास लाइसेंस नहीं है। जांच समिति ने पाया था कि लैब द्वारा सैंपल लखनऊ भेजे जाते थे। ऐसे में बड़ा सवाल है कि उदयपुर से सैंपल लखनऊ भेजे जाने के बावजूद 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट प्राप्त होना किस प्रक्रिया के तहत संभव हुआ। रिपोर्ट में ऐसे मामलों में किए गए भुगतान की विस्तृत जांच की आवश्यकता भी बताई थी।