सलूंबर जिले के सराड़ा, सेमारी और मेवल क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई संकट के स्थायी समाधान के लिए उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखा है। सांसद ने पत्र के जरिए मांग की है कि जयसमंद झील का पानी इन वंचित क्षेत्रों तक पहुंचाने की अतिरिक्त योजना को जल्द प्रशासनिक स्वीकृति दी जाए। इस पत्र का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की प्यास बुझाना और स्थानीय जलस्रोतों को जयसमंद से जोड़कर किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना है। पानी की कमी से जूझ रहे दर्जनों गांव सराड़ा और सेमारी पंचायत समिति के दर्जनों गांव आज भी बुनियादी पेयजल और सिंचाई सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। सराड़ा, केजड़, चावंड, नठारा, नालहल्कार, सरसियां और थाना जैसी ग्राम पंचायतों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। पथरीली और पहाड़ी भौगोलिक स्थिति होने के कारण यहां पारंपरिक जलस्रोत बेहद सीमित हैं। बारिश कम होने पर इन इलाकों में अकाल जैसे हालात बन जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। ग्रामीणों में रोष, लंबे समय से उठ रही मांग जयसमंद झील पास में होने के बावजूद इन गांवों को पानी नहीं मिलने से स्थानीय लोगों और मेवल क्षेत्र के ग्रामीणों में लंबे समय से आक्रोश है। ग्रामीणों का तर्क है कि जब उनके क्षेत्र की इतनी बड़ी झील का पानी दूर-दराज इलाकों में जा सकता है, तो अपने गांवों को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है? क्षेत्र के लोग लंबे समय से आंदोलन के जरिए जयसमंद का पानी देने की मांग कर रहे हैं। 4 लाख की आबादी को मिलेगा फायदा सांसद मन्नालाल रावत ने लेटर में लिखा कि सरकार इस अतिरिक्त योजना को मंजूरी देती है तो सराड़ा, सेमारी और मेवल क्षेत्र की लगभग 4 लाख से अधिक आबादी को सीधा फायदा मिलेगा। यह पूरा क्षेत्र मुख्य रूप से आदिवासी बाहुल्य है। पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होने से न केवल लोगों को पीने का साफ पानी मिलेगा। वहीं कृषि क्षेत्र को भी नया जीवन मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवाओं का पलायन रुकेगा। 7,300 करोड़ की जाखम-जयसमंद परियोजना का जिक्र सांसद ने पत्र में करीब 7,300 रुपए करोड़ की लागत वाली 'जाखम जयसमंद वृहद जल परियोजना' को मंजूरी देने के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत माही और जाखम नदियों का वह अतिरिक्त पानी, जो मानसून के दौरान बहकर अरब सागर में चला जाता था। उसे पाइपलाइन के जरिए जयसमंद झील में लाया जाएगा। इससे जयसमंद झील सालभर पानी से लबालब रहेगी। इससे दक्षिण राजस्थान के 9 जिलों को लाभ मिलेगा। स्थानीय जलस्रोतों को जोड़ने की मांग इस बड़ी परियोजना का पूरा लाभ स्थानीय लोगों को मिले। इसके लिए सांसद ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि स्थानीय छोटे तालाबों और जलस्रोतों को भी जयसमंद झील के इस नए तंत्र से जोड़ा जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को तकनीकी सर्वे करने के निर्देश दिए जाएं। सराड़ा-सेमारी को इस परियोजना से जोड़ने पर यह योजना और अधिक व्यावहारिक और जनोपयोगी बन जाएगी।