उदयपुर में भाजपा और कांग्रेस से बागी होकर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे में पार्टी सिंबल पर लड़ रहे कार्यकर्ताओं में पसोपेश की स्थिति बनी हुई है कि आखिर पार्टी नेताओं के लाख समझाने के बाद भी पार्टी के खिलाफ मैदान में डटे इन नेताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। जबकि राजस्थान के कई शहरों में दोनों पार्टियों ने बागी उम्मीदवारों को प्राथमिक सदस्यता से बर्खास्त किया है। भाजपा में इस बार 1 उम्मीदवार बागी मैदान में है तो कांग्रेस में 12 बागी पार्टी के सामने हैं। वहीं इस मामले पर दोनों जिलाध्यक्षों से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पूरा मामला पार्टी के ध्यान में है। जल्द कार्रवाई करेंगे। कांग्रेस जिलाध्यक्ष फतेहसिंह राठौड़ ने कहा कि इस बार बागियों के साथ उनका साथ देने वाले कांग्रेस नेताओं पर भी कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, नगर निगम के 80 वार्डों में इस बार भाजपा से ज्यादा कांग्रेस की चिंता है। कांग्रेस के 12 वार्डों में बागियों के नहीं मानने से उनके वार्ड में कांग्रेस को नुकसान होता दिख रहा है। हालांकि बीजेपी में ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा के गृह वार्ड में बीजेपी प्रत्याशी के सामने बागी के होने से मुकाबला कड़ा हो गया है। कमलेश मेहता की पत्नी खुशबू ने पार्टी के लिए टेंशन बढ़ाई हुई है। वार्ड नंबर 60 पुरोहितों की मादड़ी क्षेत्र में है, जहां विधायक मीणा रहते हैं। इस वार्ड में बीजेपी ने सुषमा राणावत को टिकट दिया है। इसी से नाराज होकर पूर्व पार्षद कमलेश मेहता ने अपनी पत्नी खुशबू को मैदान में उतारा। कांग्रेस के ये बागी नहीं माने! उधर, वार्ड 60 में पूर्व पार्षद कमल मेहता की पत्नी खुशबू निर्दलीय मैदान में हैं। उन्होंने नाम वापस नहीं लिया। यहां भाजपा ने सुषमा राणावत को उतार दिया तो कमल नाराज हो गए। कमल मेहता ने यहां अपनी पत्नी खुशबू मेहता से निर्दलीय नामांकन भरवा दिया था। समझाइश के बाद भी वे नहीं माने। यह वार्ड उदयपुर ग्रामीण के भाजपा विधायक फूलसिंह मीणा के घर वाले इलाके में है। वही, इस मामले में कांग्रेस जिलाध्यक्ष फतेहसिंह राठौड़ ने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सभी वार्डों के बागी उम्मीदवारों से समझाइश की, इसके बाद भी वे नहीं माने। प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा को विस्तृत रिपोर्ट बनाकर भेज रहे हैं। इसमें बागियों के साथ पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ काम करने वाले नेताओं पर भी सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे। भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि नगर निगम में 1 वार्ड को छोड़कर बागियों के लड़ने की चुनौती भाजपा में नहीं है। कांग्रेस में एक दर्जन बागी हैं। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के ध्यान में पूरा मामला है। जल्द पार्टी भी कार्रवाई करेगी।